25 साल बाद फिर सजा यादों का कारवां: बीएचयू भौतिकी विभाग के पूर्व छात्र पुनर्मिलन में हुए एकजुट
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के भौतिकी विभाग के वर्ष 1999-2001 एम.एससी. बैच के पूर्व छात्रों का 25 वर्षीय पुनर्मिलन समारोह “Then vs Now – 25 साल की यात्रा” शनिवार को विभाग परिसर में उत्साह और भावनात्मक माहौल के बीच आयोजित किया गया। इस अवसर पर भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों से 50 से अधिक पूर्व छात्र प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए और छात्र जीवन की यादों को साझा किया।
समारोह का शुभारंभ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय को श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद पूर्व छात्रों ने अपने गुरुजनों को नमन करते हुए उनके मार्गदर्शन और योगदान को याद किया। कार्यक्रम में उन शिक्षकों का विशेष उल्लेख किया गया, जिन्होंने विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन को नई दिशा दी। इनमें कई शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक भी शामिल रहे।
भौतिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. आर.के. सिंह ने सभी पूर्व छात्रों का स्वागत करते हुए कहा कि 25 वर्षों बाद अपने विद्यार्थियों को विभाग में देखकर अत्यंत खुशी हो रही है। उन्होंने इस बैच को विभाग के इतिहास का सबसे उत्पादक बैच बताते हुए कहा कि इसके सदस्यों ने देश और विदेश में शिक्षा, अनुसंधान तथा विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। उन्होंने पूर्व छात्रों से वर्तमान विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और विभाग से निरंतर जुड़े रहने का आग्रह भी किया।
विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. संजय कुमार ने भी पूर्व छात्रों की उपलब्धियों की सराहना की और उनसे विज्ञान संस्थान में एंडोमेंट छात्रवृत्तियां स्थापित करने की अपील की, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में सहयोग मिल सके। इस पुनर्मिलन में भारत के अलावा अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ताइवान सहित कुल नौ देशों से पूर्व छात्र ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से जुड़े। कार्यक्रम में बैच की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि इस समूह में एक शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक, 17 विश्वविद्यालयों में कार्यरत भौतिकी के प्रोफेसर, 15 महाविद्यालयों के शिक्षक, डीआरडीओ, बार्क और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में कार्यरत 10 शोध वैज्ञानिक तथा पांच डेटा साइंटिस्ट एवं सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कई सदस्य सरकारी सेवाओं, स्टार्टअप और नेतृत्वकारी पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
पूर्व छात्रों ने कहा कि बीएचयू ने उन्हें केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की सोच, आत्मविश्वास और वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि भले ही वे आज दुनिया के अलग-अलग देशों में कार्यरत हों, लेकिन बीएचयू और आपसी मित्रता का रिश्ता आज भी पहले जैसा मजबूत है। कार्यक्रम के समापन पर सभी पूर्व छात्रों ने भविष्य में भी इस परंपरा को जारी रखने, विभाग से जुड़ाव बनाए रखने तथा समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। समारोह का समापन "जय हिंद, जय बीएचयू" के उद्घोष के साथ हुआ।