जन्माष्टमी पर आदि केशव घाट पर हुई आदि केशव की आरती, देश की उन्नति और पर्यावरण संरक्षण की कामना

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को नमामि गंगे की ओर से काशी के प्राचीन विष्णु तीर्थ आदि केशव घाट पर विशेष पूजन-अर्चन और आरती का आयोजन किया गया। भगवान आदि केशव की विधिवत आरती उतारकर देश की उन्नति, लोकमंगल, सुख-समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष माखन-मिश्री का भोग अर्पित किया और गंगा सहित सभी नदियों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त रखने का संकल्प लिया।
 

माखन-मिश्री का भोग लगाकर नमामि गंगे ने किया पूजन, श्रद्धालुओं ने नदियों को स्वच्छ रखने का लिया संकल्प

वाराणसी। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को नमामि गंगे की ओर से काशी के प्राचीन विष्णु तीर्थ आदि केशव घाट पर विशेष पूजन-अर्चन और आरती का आयोजन किया गया। भगवान आदि केशव की विधिवत आरती उतारकर देश की उन्नति, लोकमंगल, सुख-समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष माखन-मिश्री का भोग अर्पित किया और गंगा सहित सभी नदियों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त रखने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान नमामि गंगे के सदस्यों और श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके आदर्शों तथा प्रकृति संरक्षण से जुड़े प्रसंगों को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन तथा सह-अस्तित्व की प्रेरणा देता है। जन्माष्टमी के अवसर पर धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उनके विचारों और जीवन मूल्यों को अपनाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर अहंकार रूपी कंस का प्रभाव नहीं होना चाहिए, बल्कि श्रीकृष्ण के प्रेम, समत्व और सकारात्मकता का भाव होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के अनेक संदेश मिलते हैं। कालिया नाग के प्रसंग को जलस्रोतों को प्रदूषण से मुक्त रखने की प्रेरणा से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि नदियों का स्वच्छ और निर्मल रहना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। राजेश शुक्ला ने कहा कि गोवर्धन पर्वत, गौवंश, यमुना और वृंदावन से जुड़े श्रीकृष्ण के प्रसंग प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देते हैं। वर्तमान समय में जल और पर्यावरण प्रदूषण की चुनौती के बीच श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेकर प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाया जा सकता है।

उन्होंने लोगों से नदियों में कूड़ा-कचरा नहीं डालने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने, घाटों की स्वच्छता बनाए रखने और जलस्रोतों के संरक्षण के लिए जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि गंगा समेत सभी नदियों को स्वच्छ रखना केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है।

आदि केशव घाट पर श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर आरती में भाग लिया। इसके बाद भगवान को माखन-मिश्री का भोग अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने देश में सुख-शांति, समृद्धि, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण की कामना की। कार्यक्रम में आदि केशव मंदिर के महंत, नमामि गंगे के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। आरती और लोकमंगल की प्रार्थना के साथ आयोजन का समापन हुआ।