BHU ट्रॉमा सेंटर में घायल छात्र के इलाज में देरी का आरोप, छात्र बोले- सुरक्षाकर्मियों ने किया दुर्व्यवहार, आक्रोश 

BHU के बिरला ‘सी’ छात्रावास के छात्र एवं फ्रेंच विभाग में एमए द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी राम के उपचार को लेकर छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों के अनुसार, बीती मध्यरात्रि करीब 12 बजे दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद राम को उपचार के लिए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, लेकिन आरोप है कि उन्हें समय पर आवश्यक प्राथमिक उपचार नहीं मिला। छात्रों का दावा है कि गंभीर घाव पर कई घंटे तक टांके नहीं लगाए गए।
 

वाराणसी। BHU के बिरला ‘सी’ छात्रावास के छात्र एवं फ्रेंच विभाग में एमए द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी राम के उपचार को लेकर छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों के अनुसार, बीती मध्यरात्रि करीब 12 बजे दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद राम को उपचार के लिए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, लेकिन आरोप है कि उन्हें समय पर आवश्यक प्राथमिक उपचार नहीं मिला। छात्रों का दावा है कि गंभीर घाव पर कई घंटे तक टांके नहीं लगाए गए।

सुबह घायल छात्र की स्थिति जानने और उपचार में मदद के लिए बिरला ‘सी’ छात्रावास के कई विद्यार्थी ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल कर्मियों से इलाज में तेजी लाने का आग्रह किया, लेकिन अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई। इस दौरान कुछ सुरक्षाकर्मियों द्वारा छात्रों से कथित दुर्व्यवहार और धमकी भरे लहजे में बात करने का भी आरोप लगाया गया। छात्रों के मुताबिक, उपचार की मांग के बाद भी करीब 12 घंटे तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। बाद में राम के गंभीर घाव पर 29 टांके लगाए गए।

प्रॉक्टोरियल अधिकारियों के व्यवहार पर भी सवाल
मामले की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के कुछ प्रॉक्टोरियल अधिकारी मौके पर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि स्थिति को शांत करने और उनकी बात सुनने के बजाय उनसे अभद्र भाषा में बात की गई। छात्रों ने धक्का-मुक्की और हाथापाई जैसी स्थिति उत्पन्न होने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि घायल छात्र राम के लिए कथित रूप से “लावारिस” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

छात्रों के अनुसार, जब उन्होंने इलाज में देरी और अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल किए तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी बीच पुलिस को प्रॉक्टोरियल अधिकारियों की ओर से बुलाए जाने की बात भी सामने आई। छात्रों का आरोप है कि बाद में पूरे घटनाक्रम को इस रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया कि छात्रों ने प्रॉक्टर के साथ मारपीट की।

बिना उपचार पूरा किए डिस्चार्ज का आरोप
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि घायल राम को आवश्यक उपचार पूरा हुए बिना डिस्चार्ज करने का प्रयास किया गया। विरोध के बाद उन्हें दोबारा भर्ती किया गया और चिकित्सक के करीब तीन बजे उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। तनाव बढ़ने पर प्रशासनिक वार्डन मौके पर पहुंचे और छात्रों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। इसके बाद छात्रों को छात्रावास लौटाया गया। छात्र समुदाय ने वार्डन की पहल को सकारात्मक बताते हुए मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।

छात्रों की मांग है कि उपचार में हुई देरी की मेडिकल टाइमलाइन और अस्पताल रिकॉर्ड की जांच हो। साथ ही, अस्पताल कर्मियों व सुरक्षाकर्मियों के कथित दुर्व्यवहार तथा प्रॉक्टोरियल अधिकारियों पर लगाए गए अभद्रता, धक्का-मुक्की के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए। छात्रों का कहना है कि घायल विद्यार्थी को आवश्यक चिकित्सा सुविधा और सम्मान मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।