बीएचयू में मशाल यात्रा निकालकर एबीवीपी ने जताया विरोध, छात्र हित और सुरक्षा के मुद्दे उठाए
अनिश्चितकालीन धरने के नौवें दिन सेंट्रल ऑफिस से लंका गेट तक निकली यात्रा, प्रशासन से लंबित मांगों के समाधान की मांग
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्र हितों, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की बीएचयू इकाई ने गुरुवार को मशाल यात्रा निकाली। अनिश्चितकालीन धरने के नौवें दिन सेंट्रल ऑफिस से शुरू हुई यात्रा लंका गेट तक पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और परिषद कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्र हितों की अनदेखी और प्रॉक्टोरियल व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए महिला सुरक्षा, छात्र अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाए। इससे एक दिन पहले भी परिषद कार्यकर्ताओं ने चीफ प्रॉक्टर से जुड़ी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।
मशाल यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की ओर से स्थापित विश्वविद्यालय की मूल भावना, शैक्षणिक गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प दोहराया। एबीवीपी इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं के समाधान के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने छात्र संगठनों के साथ व्यवहार, प्रॉक्टोरियल बोर्ड की कार्यप्रणाली और परिसर में महिला सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए।
इकाई मंत्री अनुराग तिवारी ने कहा कि महामना ने बीएचयू को राष्ट्रनिर्माण, चरित्र निर्माण, भारतीय संस्कृति और उत्कृष्ट शिक्षा के केंद्र के रूप में स्थापित करने की परिकल्पना की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रावासों की अव्यवस्था, परिसर की सुरक्षा, प्रॉक्टोरियल बोर्ड की कार्यशैली और विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दों पर बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं हुआ।
एमएमवी तिराहे पर कार्यकर्ताओं ने छात्र समूह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों की समस्याओं पर संवाद और समाधान की प्रक्रिया शुरू करने का आह्वान किया। परिषद ने छात्र हितों से जुड़े लंबित मामलों का निष्पक्ष निस्तारण, आंदोलनरत विद्यार्थियों के खिलाफ हुई कार्रवाइयों की समीक्षा तथा परिसर में सुरक्षित और पारदर्शी शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की।
एबीवीपी ने कहा कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रहेगा। हाल के विरोध प्रदर्शनों में प्रशासन और प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के बीच तनाव की स्थिति भी सामने आई थी।