मणिकर्णिका घाट पर त्रिदिवसीय श्रृंगार महोत्सव 23 मार्च से, बाबा महाश्मसान नाथ का होगा भव्य पूजन
वाराणसी। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मणिकर्णिका घाट स्थित श्री श्री 1008 बाबा महाश्मसान नाथ मंदिर में 23 मार्च से 25 मार्च तक त्रिदिवसीय श्रृंगार महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान बाबा का विशेष श्रृंगार, पूजन-अर्चन और धार्मिक अनुष्ठानों का भव्य आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
पहले दिन रुद्राभिषेक और श्रृंगार पूजन से होगा शुभारंभ
महोत्सव के प्रथम दिन 23 मार्च, सोमवार को शास्त्रोक्त विधि-विधान से रुद्राभिषेक, श्रृंगार पूजन और आरती की जाएगी। इस दिन बाबा महाश्मसान नाथ का विशेष श्रृंगार कर विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी, जिससे पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण रहेगा।
दूसरे दिन भंडारा और भजन संध्या का आयोजन
महोत्सव के दूसरे दिन 24 मार्च, मंगलवार को दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। इसके बाद रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण का कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां भक्त पूरी रात भक्ति में लीन रहेंगे।
तीसरे दिन तांत्रोक्त पूजन और महाआरती
महोत्सव के अंतिम दिन 25 मार्च, बुधवार को तांत्रोक्त विधि से पूजन-अभिषेक किया जाएगा। इसके साथ ही नगर वधुओं द्वारा नित्यांजली अर्पित की जाएगी, जो इस आयोजन की विशेष परंपरा मानी जाती है। रात्रि में महाआरती के साथ इस त्रिदिवसीय महोत्सव का समापन होगा।
स्थान की कमी के कारण मंदिर परिसर में ही होंगे सभी आयोजन
मंदिर प्रशासन ने बताया कि मणिकर्णिका घाट पर चल रहे नव निर्माण कार्यों के चलते स्थान की कमी और अन्य व्यवस्थागत समस्याओं के कारण सभी कार्यक्रम मंदिर प्रांगण में ही आयोजित किए जाएंगे। प्रशासन और नगर निगम से अपेक्षित सहयोग न मिलने की बात भी सामने आई है।
श्रद्धालुओं से सावधानी और समय का ध्यान रखने की अपील
मंदिर समिति के अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता, महामंत्री बिहारी लाल गुप्ता और मंदिर व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे समय से पहुंचें और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें, ताकि आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
भक्ति और परंपरा का अनूठा संगम
यह त्रिदिवसीय श्रृंगार महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि काशी की प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का भी जीवंत उदाहरण है, जो हर वर्ष श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।