रामनगर में बनेगा अत्याधुनिक शिप रिपेयर सेंटर, गंगा किनारे ही होगी बड़े जलयानों की मरम्मत

रामनगर क्षेत्र में भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की महत्वाकांक्षी शिप रिपेयर फैसिलिटी परियोजना जल्द ही धरातल पर उतरने जा रही है। इस अत्याधुनिक केंद्र के निर्माण का कार्य देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को सौंपा गया है। कंपनी ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल के माध्यम से परियोजना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।
 

वाराणसी। रामनगर क्षेत्र में भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की महत्वाकांक्षी शिप रिपेयर फैसिलिटी परियोजना जल्द ही धरातल पर उतरने जा रही है। इस अत्याधुनिक केंद्र के निर्माण का कार्य देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को सौंपा गया है। कंपनी ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल के माध्यम से परियोजना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।

करीब 321.39 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह शिप रिपेयर फैसिलिटी सेंटर रामनगर मल्टीमॉडल टर्मिनल के समीप विकसित किया जाएगा। वर्तमान में इस सुविधा का अस्थायी संचालन राल्हूपुर क्षेत्र में किया जा रहा है। परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री ने जामनगर से वर्चुअल माध्यम से किया था।

आईडब्ल्यूएआई के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना और जलमार्ग विकास कार्यक्रम को नई गति प्रदान करेगी। अब तक बड़े जहाजों और जलयानों की मरम्मत के लिए उन्हें समुद्री तटों तक ले जाना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों अधिक लगते थे। रामनगर में बनने वाले इस केंद्र के शुरू होने के बाद गंगा किनारे ही आधुनिक ड्राई-डॉक सुविधा उपलब्ध हो जाएगी, जिससे जहाजों की मरम्मत स्थानीय स्तर पर संभव हो सकेगी।

परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ड्राई-डॉक होगा। ड्राई-डॉक एक विशेष प्रकार का आयताकार बेसिन होता है, जिसमें जलयान को लाकर खड़ा किया जाता है। इसके बाद पंपों की सहायता से पानी बाहर निकाल दिया जाता है और सूखी सतह पर जहाज की मरम्मत एवं रखरखाव का कार्य किया जाता है। कार्य पूर्ण होने के बाद बेसिन में दोबारा पानी भरकर जलयान को नदी की मुख्य धारा में उतार दिया जाता है।

अधिकारियों का कहना है कि यह सुविधा न केवल जल परिवहन क्षेत्र को मजबूती देगी बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगी। एक जलयान की मरम्मत के दौरान प्रतिदिन लगभग 30 से 40 लोगों की आवश्यकता होती है। रामनगर स्थित इस केंद्र में एक साथ चार जलयानों की मरम्मत की जा सकेगी, जिससे बड़ी संख्या में तकनीकी और सहायक रोजगार सृजित होंगे।

आईडब्ल्यूएआई वाराणसी के निदेशक संजीव कुमार ने बताया कि जल परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रामनगर मल्टीमॉडल टर्मिनल पर ड्राई-डॉक का निर्माण कराया जा रहा है। एलएंडटी को निर्माण की जिम्मेदारी सौंप दी गई है और जल्द ही कार्य शुरू होगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से गंगा जलमार्ग पर माल एवं यात्री परिवहन को नई गति मिलेगी तथा पूर्वांचल क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा।