गांव गिराव में आत्मरक्षा की पाठशाला : पढ़ाई के बाद बच्चों को रोज दो घंटे मुफ्त कराटे सिखाते हैं आकाश पटेल
2024 में शुरू की पहल, छह से 18 वर्ष तक के दो दर्जन से अधिक बालक-बालिकाएं ले रहे प्रशिक्षण; राष्ट्रीय प्रतियोगिता में महिमा ने जीता स्वर्ण पदक
वाराणसी। राजातालाब क्षेत्र के आराजीलाईन विकास खंड के गांव गिराव में बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मरक्षा में सक्षम बनाने के लिए एक युवा ने अनूठी पहल की है। गंगापुर इंटर कॉलेज में कक्षा 11 के छात्र और कराटे में ब्लैक बेल्ट धारी आकाश पटेल पढ़ाई के बाद प्रतिदिन शाम को बच्चों को निःशुल्क जूडो-कराटे का प्रशिक्षण देते हैं। उनका उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें विपरीत परिस्थितियों में अपनी सुरक्षा करने के योग्य बनाना है।
गांव के सम्पूर्णा लान में संचालित इस प्रशिक्षण केंद्र में छह से 18 वर्ष तक के दो दर्जन से अधिक बालक-बालिकाएं अभ्यास कर रहे हैं। यहां प्रतिदिन दो घंटे की कक्षा लगती है। इसमें एक घंटे शारीरिक व्यायाम और एक घंटे जूडो-कराटे की तकनीक सिखाई जाती है। पांच बार ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुके शोभनाथ पटेल के नेतृत्व में बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पढ़ाई के साथ समाजसेवा का जुनून
आकाश पटेल ने वर्ष 2024 में बच्चों को मुफ्त कराटे प्रशिक्षण देने की शुरुआत की थी। पढ़ाई की व्यस्तता के बावजूद वह प्रतिदिन शाम को मैदान पहुंचते हैं और बच्चों को पूरे समर्पण के साथ अभ्यास कराते हैं। इसके लिए वह किसी प्रकार का शुल्क नहीं लेते। उनका मानना है कि आत्मरक्षा का हुनर हर बच्चे के लिए उपयोगी है और आर्थिक स्थिति किसी की सीखने की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए।
महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़े सवालों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण में आत्मरक्षा की तकनीकों पर विशेष जोर दिया जाता है। बच्चों को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ अनुशासन, सतर्कता और आत्मविश्वास का महत्व भी समझाया जाता है, ताकि वे जरूरत पड़ने पर कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकें।
प्रतियोगिताओं में दिखा रहे प्रतिभा
प्रशिक्षण केंद्र के बच्चे खेल प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गांव की महिमा पटेल ने सब-जूनियर आयु वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर उपलब्धि हासिल की। वहीं, वाराणसी में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पीयूष वर्मा और आनवी सिंह ने रजत पदक जीते। इन उपलब्धियों से बच्चों और उनके प्रशिक्षकों का उत्साह बढ़ा है।
आत्मविश्वास बढ़ाना है लक्ष्य
आकाश की इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों को कराटे में दक्ष बनाना नहीं, बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाना भी है। नियमित अभ्यास से बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता और आत्मविश्वास विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। गांव में निःशुल्क प्रशिक्षण की यह पहल उन परिवारों के बच्चों के लिए भी अवसर उपलब्ध करा रही है, जो महंगी खेल कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते।