काशी में अक्षय तृतीया व परशुराम जयंती पर भव्य आयोजन, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 100 से अधिक बटुकों का हुआ यज्ञोपवीत संस्कार
वाराणसी। अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जयंती के पावन अवसर पर रविवार को सरयू पारीण ब्राह्मण परिषद के तत्वावधान में एक भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अस्सी स्थित गोयनका संस्कृत महाविद्यालय के सभागार और सिद्धेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में संपन्न हुआ, जिसमें विभिन्न जिलों और प्रांतों से आए 100 से अधिक बटुकों का विधि-विधान से यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार कराया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक परंपरा के अनुसार पंचांग पूजन से हुई, जिसे काशी के प्रतिष्ठित वैदिक विद्वानों ने संपन्न कराया। मुख्य आचार्य पंडित पारस नाथ पांडेय के नेतृत्व में 15 आचार्यों की टीम ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी बटुकों का उपनयन संस्कार संपन्न कराया। इस दौरान मुख्य यजमान के रूप में डॉ. नागेंद्र द्विवेदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संस्कार के बाद आयोजित समावर्तन कार्यक्रम में परिषद के अध्यक्ष पंडित पारस नाथ उपाध्याय ने बटुकों को द्विजत्व के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि उपनयन केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, संस्कार और कर्तव्य पालन की शुरुआत है। उन्होंने सभी नवदीक्षित बटुकों को सनातन परंपराओं का पालन करने और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में परिषद के संरक्षक सतीश चंद्र मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त करते हैं। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्रा और महापौर अशोक तिवारी ने परिषद के प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर संरक्षक डॉ. गिरीश चंद्र तिवारी, कुल पीठाधीश्वर सचिन और महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हर्षवर्धन मिश्र सहित कई विद्वानों और गणमान्य व्यक्तियों ने बटुकों को आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन परिषद के मंत्री मिलन चतुर्वेदी ने किया। कार्यक्रम के समापन पर लगभग 600 लोगों ने महाप्रसाद और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
इस दौरान नरेंद्र त्रिपाठी, शिवदत्त द्विवेदी, रितेश तिवारी, रमाकांत त्रिपाठी, सिद्धार्थ पांडेय, वाचस्पति मिश्रा, पंकज पांडेय, प्रकाश दूबे, कलाधर दुबे, प्रकाश पांडेय, मुनि जी तिवारी, वेद मिश्रा, हरिकेश यादव, मुक्तेश्वर द्विवेदी, माया पांडेय, शीतला प्रसाद पांडेय और केदार तिवारी सहित अनेक पदाधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।