पुरी की तर्ज पर काशी में बनेगा भगवान जगन्नाथ का भव्य कॉरिडोर, 140 फीट ऊंचा शिखर, महाप्रसाद और वेदाध्ययन की रहेगी व्यवस्था 

भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी की तर्ज पर अब काशी में भी श्री जगन्नाथ मंदिर का भव्य पुनर्विकास किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत लगभग एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में विशाल जगन्नाथ कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। मंदिर परिसर का विस्तार, सौंदर्यीकरण और सुविधाओं का विकास प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला के अनुरूप किया जाएगा, जबकि मंदिर की मूल संरचना और प्राचीन विग्रहों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।
 

लगभग एक लाख वर्गफीट में विकसित होगा कॉरिडोर, नृसिंह मंदिर का शिखर होगा 151 फीट ऊंचा 

पहले चरण में 30 करोड़ रुपये खर्च, दिसंबर 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य

नागर शैली में होगा निर्माण, राजस्थान के लाल, गुलाबी और सफेद पत्थरों से होगी नक्काशी

मूल संरचना, प्राचीन विग्रह और ऐतिहासिक स्वरूप को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा

वाराणसी। भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी की तर्ज पर अब काशी में भी श्री जगन्नाथ मंदिर का भव्य पुनर्विकास किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत लगभग एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में विशाल जगन्नाथ कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। मंदिर परिसर का विस्तार, सौंदर्यीकरण और सुविधाओं का विकास प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला के अनुरूप किया जाएगा, जबकि मंदिर की मूल संरचना और प्राचीन विग्रहों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।

बुधवार को परियोजना की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई, जब इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स और ग्राफिक्स डिजाइनरों की टीम ने मंदिर परिसर पहुंचकर विस्तृत नाप-जोख की। राजस्थान से आए शिल्पकारों ने भी स्थल का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की प्रारंभिक रूपरेखा तैयार की। सबसे पहले परिसर में स्थित गरुड़ मंदिर का मापन किया गया।

151 फीट ऊंचा होगा नृसिंह मंदिर का शिखर
परियोजना के अनुसार मंदिर परिसर के पीछे स्थित भगवान नृसिंह मंदिर का शिखर 151 फीट ऊंचा बनाया जाएगा, जबकि मुख्य जगन्नाथ मंदिर का शिखर 140 फीट ऊंचाई का होगा। निर्माण इस प्रकार किया जाएगा कि मां गंगा में स्नान करने वाले श्रद्धालु नदी तट से ही मंदिर के मुख्य शिखर के दर्शन कर सकें। इससे काशी के धार्मिक और पर्यटन महत्व को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

महाप्रसाद, आवास और वेदाध्ययन की सुविधा
पुनर्विकास योजना में श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। परिसर में वेदाध्ययन, पारंपरिक ज्ञान और धार्मिक शिक्षा की व्यवस्था होगी। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को निःशुल्क महाप्रसाद और भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि अत्यंत कम शुल्क पर आवासीय सुविधा भी विकसित की जाएगी।

30 करोड़ का पहला चरण, 41 महीने में पूरा होगा निर्माण
श्री जगन्नाथ जी ट्रस्ट के अनुसार परियोजना के पहले चरण में लगभग 30 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। संपूर्ण निर्माण कार्य को पूरा होने में करीब 41 महीने लगेंगे। निर्धारित समय के अनुसार कार्य पूरा होने पर दिसंबर 2029 तक मंदिर अपने नए और भव्य स्वरूप में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए तैयार हो जाएगा।

नागर शैली में होगा निर्माण
मंदिर का निर्माण प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला की नागर शैली में किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी राजस्थान के प्रसिद्ध शिल्पकार गिरिराज सैनी और उनकी टीम को सौंपी गई है। निर्माण और नक्काशी में धौलपुर के लाल, गुलाबी और सफेद पत्थरों का उपयोग होगा, जिससे मंदिर की भव्यता और कलात्मकता और अधिक आकर्षक बनेगी।

मूल स्वरूप रहेगा सुरक्षित
ट्रस्ट के सचिव शैलेष त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि पुनर्विकास के दौरान मंदिर की मूल संरचना, प्राचीन विग्रहों और ऐतिहासिक स्वरूप से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। पूरा निर्माण कार्य विरासत संरक्षण के सिद्धांतों के अनुरूप किया जाएगा।

विशेषज्ञों की टीम ने किया तकनीकी निरीक्षण
निरीक्षण करने वाली टीम में हेड इंजीनियर रजनीकांत उपाध्याय, आर्किटेक्ट अमित कुमार गुप्ता, आर्किटेक्ट जयेश तिवारी, ग्राफिक्स डिजाइनर संजेश मिश्रा, अभिषेक पांडेय और मानसिंह पटेल शामिल रहे। टीम ने स्थल का तकनीकी निरीक्षण कर निर्माण कार्य की प्रारंभिक रूपरेखा तैयार की।

श्री काशी विश्वनाथ धाम के बाद प्रस्तावित जगन्नाथ कॉरिडोर को काशी की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान को नई ऊंचाई देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके पूर्ण होने पर श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं से युक्त, लेकिन पारंपरिक आस्था और विरासत से जुड़ा एक भव्य धार्मिक परिसर उपलब्ध होगा।