लोलार्क षष्ठी पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब, आधी रात से कुंड में शुरू होगा स्नान, 200 पुलिसकर्मी संभालेंगे सुरक्षा की कमान 

काशी में लोलार्क षष्ठी पर्व पर आस्था का सैलाब उमड़ने वाला है। भदैनी स्थित प्राचीन लोलार्क कुंड पर 17 सितंबर को होने वाले पर्व को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। 16 सितंबर की मध्यरात्रि के बाद से ही श्रद्धालुओं के कुंड में स्नान का सिलसिला शुरू हो जाएगा। संतान सुख की कामना से देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में दंपती काशी पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण की व्यापक व्यवस्था की है।
 

वाराणसी। काशी में लोलार्क षष्ठी पर्व पर आस्था का सैलाब उमड़ने वाला है। भदैनी स्थित प्राचीन लोलार्क कुंड पर 17 सितंबर को होने वाले पर्व को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। 16 सितंबर की मध्यरात्रि के बाद से ही श्रद्धालुओं के कुंड में स्नान का सिलसिला शुरू हो जाएगा। संतान सुख की कामना से देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में दंपती काशी पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण की व्यापक व्यवस्था की है। 

पर्व से पहले ही लोलार्क कुंड और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। शनिवार की दोपहर से आसपास के इलाकों में भीड़ जुटने लगी, जबकि देर शाम से श्रद्धालु बैरिकेडिंग के बीच कतारबद्ध होने लगे। भीड़ को व्यवस्थित तरीके से कुंड तक पहुंचाने के लिए प्रवेश और निकास की अलग व्यवस्था की जा रही है।

अलग-अलग होंगे प्रवेश और निकास द्वार
लोलार्क षष्ठी मेले की तैयारियों का एडीसीपी वैभव बांगर ने निरीक्षण किया। उन्होंने नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, बिजली विभाग और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग द्वार बनाए जाएं, ताकि भीड़ का दबाव एक ही स्थान पर न बढ़े।

श्रद्धालुओं को धूप और मौसम से राहत देने के लिए बैरिकेडिंग के ऊपर पर्दे लगाए गए हैं। सुरक्षा प्वाइंटों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। मेले के दौरान प्रमुख मार्गों पर वन-वे यातायात व्यवस्था लागू रहेगी। वैकल्पिक मार्गों पर भी पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, जिससे वाहनों का दबाव और जाम की स्थिति नियंत्रित की जा सके।

सीसीटीवी के साथ ड्रोन से निगरानी
लोलार्क कुंड मेले में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जाएगी। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से भीड़ की निगरानी की जाएगी। पुलिस कंट्रोल रूम से पूरे मेला क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। भेलूपुर थाना प्रभारी के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षा के लिए पैरामिलिट्री फोर्स की मांग की गई है। कुंड में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए एनडीआरएफ और जल पुलिस के जवान तैनात रहेंगे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जल क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जाएगी। भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सहायता के लिए स्वयंसेवकों की भी तैनाती होगी। सुरक्षा व्यवस्था में पांच एडिशनल एसपी, आठ क्षेत्राधिकारी, 14 निरीक्षक और 40 उपनिरीक्षक समेत करीब 200 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। इसके अलावा करीब 100 महिला पुलिसकर्मी, एक कंपनी पीएसी और एक कंपनी पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती प्रस्तावित है।

संतान सुख की कामना से पहुंचते हैं दंपती
लोलार्क षष्ठी काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखती है। भदैनी का लोलार्क कुंड सूर्य उपासना से जुड़ा प्रमुख तीर्थ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां सूर्यदेव के रथ का पहिया गिरा था, इसलिए इसका नाम लोलार्क पड़ा। भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के दिन लोलार्क कुंड में स्नान को लेकर विशेष धार्मिक मान्यता है। माना जाता है कि पति-पत्नी एक साथ कुंड में स्नान कर सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करें तो संतान सुख की मनोकामना पूरी होती है। इसी विश्वास के चलते संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपती देश के विभिन्न हिस्सों से लोलार्क कुंड पहुंचते हैं। स्नान के बाद श्रद्धालु सूर्यदेव और कुंड की पूजा करते हैं तथा अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। पर्व के दौरान कुंड और आसपास के मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना होती है।

फल में सुई चुभाने की अनोखी परंपरा
लोलार्क षष्ठी की सबसे अलग परंपराओं में स्नान के बाद फल में सुई चुभाना भी शामिल है। श्रद्धालु कुंड में स्नान के बाद फल खरीदते हैं और उसमें सुई चुभाते हैं। धार्मिक मान्यता में इसे सूर्य की किरणों और संतान सुख की कामना से जोड़कर देखा जाता है। लोलार्क कुंड की बनावट और यहां पड़ने वाली सूर्य की किरणों को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के दिन कुंड में स्नान और सूर्य उपासना को पुण्यदायी माना जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष लोलार्क षष्ठी पर काशी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। इस बार भी प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही, कुंड में स्नान के दौरान भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है।