300 करोड़ से होगा काशी के 84 घाटों का संरक्षण और सुंदरीकरण, मूल स्वरूप से छेड़छाड़ किए बिना ऐतिहासिक पहचान को रखा जाएगा बरकरार
वाराणसी। काशी की पहचान और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक 84 घाटों के संरक्षण और सुंदरीकरण की तैयारी तेज हो गई है। करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से घाटों का संरक्षण और विकास कराया जाएगा। परियोजना के तहत घाटों के ऐतिहासिक स्वरूप और उनकी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए आवश्यक कार्य किए जाएंगे।
लगातार बारिश और समय के साथ कई घाटों के हिस्से कमजोर हुए हैं। कुछ घाटों पर पुराने निर्माण और संरचनाओं के प्रभावित होने की स्थिति भी सामने आई है। ऐसे में घाटों की मजबूती के साथ उनके मूल स्वरूप को संरक्षित रखने पर जोर दिया जाएगा। परियोजना के तहत पुराने और ऐतिहासिक घाटों की पहचान कर उनका संरक्षण एवं सुंदरीकरण कराया जाएगा। उद्देश्य यह है कि घाटों के प्राचीन स्वरूप में अनावश्यक बदलाव किए बिना उनकी संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए घाटों को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में काशी की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि काशी के घाट उसकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इनके संरक्षण के लिए सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि परियोजना के माध्यम से घाटों की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा। इससे काशी आने वाले श्रद्धालुओं और देश-विदेश के पर्यटकों को घाटों के प्राचीन स्वरूप के साथ बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। अधिकारियों के स्तर पर परियोजना से जुड़े कार्यों की रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।