बीएचयू में प्लाज्मा विज्ञान का प्रदर्शन, 700 विद्यार्थियों ने मॉडलों से समझीं ऊर्जा और पर्यावरण की नई संभावनाएं
पांच दिवसीय राष्ट्रीय प्रदर्शनी के तीसरे दिन छात्रों में दिखा उत्साह, वैज्ञानिकों ने बताए पदार्थ की चौथी अवस्था के व्यावहारिक उपयोग
वाराणसी। ऊर्जा संकट के समाधान से लेकर पर्यावरण शुद्धिकरण तक, विज्ञान की नई तकनीकें भविष्य की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसी उद्देश्य से काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के भौतिक विज्ञान विभाग में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय प्रदर्शनी में बुधवार को लगभग 700 विद्यार्थियों ने प्लाज्मा विज्ञान की दुनिया को करीब से जाना। ‘पदार्थ की चौथी अवस्था: प्लाज्मा’ विषय पर आयोजित इस प्रदर्शनी के तीसरे दिन वैज्ञानिक मॉडलों और उनके व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान की संभावनाओं से परिचित कराया गया।
प्रदर्शनी में शहर के विभिन्न विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें सनबीम कॉलेज फॉर विमेन, वरुणा, सेंट्रल हिंदू स्कूल, कमच्छा, सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल, कमच्छा, केंद्रीय विद्यालय, बीएचयू और सनबीम स्कूल, भगवानपुर के विद्यार्थी शामिल रहे। इसके अलावा राजनीति विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विभिन्न मॉडलों के माध्यम से जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाया गया, जिससे विद्यार्थियों में विषय को लेकर जिज्ञासा बढ़ी।
ऊर्जा संकट और प्रदूषण नियंत्रण में प्लाज्मा की भूमिका
प्रदर्शनी के समन्वयक प्रोफेसर रजनीश कुमार ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में प्लाज्मा विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि प्रयोगों और मॉडलों के माध्यम से विज्ञान को समझने से विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ उसके व्यावहारिक पक्ष की भी जानकारी मिलती है।
उन्होंने बताया कि प्लाज्मा विज्ञान भविष्य में ऊर्जा उत्पादन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। इस क्षेत्र में अनुसंधान और तकनीकी विकास से ऊर्जा संबंधी चुनौतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति संभव है।
वैज्ञानिक मॉडलों ने समझाई प्लाज्मा की दुनिया
प्रदर्शनी में इंस्टीट्यूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च (आईपीआर) के वैज्ञानिकों ने विभिन्न आकर्षक और ज्ञानवर्धक मॉडल प्रस्तुत किए। इनके जरिए विद्यार्थियों को प्लाज्मा के गुणों, उसकी कार्यप्रणाली और विभिन्न क्षेत्रों में उसके उपयोगों की जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों ने मॉडलों का अवलोकन कर वैज्ञानिकों से सवाल पूछे और प्लाज्मा के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समझा। स्वास्थ्य सेवाओं, अंतरिक्ष अनुसंधान, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण में इसकी संभावनाओं ने विद्यार्थियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी ने उन्हें पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर विज्ञान को प्रयोगों के माध्यम से समझने का अवसर दिया।
समापन समारोह में शामिल होंगे छात्र अधिष्ठाता
पांच दिवसीय राष्ट्रीय प्रदर्शनी के समापन समारोह में बीएचयू के छात्र अधिष्ठाता प्रोफेसर रंजन कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। आयोजन से जुड़े शिक्षकों और वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और उन्हें अनुसंधान एवं नवाचार के लिए प्रेरित करने में सहायक हैं।
इस अवसर पर प्रोफेसर राजेंद्र कुमार सिंह, प्रोफेसर अभय सिंह, प्रोफेसर अमित पाठक, कुमार अंकित, अभिज्ञान बरुआ और आयुष उपाध्याय सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहे।