स्वर्णमयी आभा से दमका मां कुष्मांडा का दरबार, 15 हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

दुर्गाकुंड स्थित भगवती मां कुष्मांडा मंदिर में चल रहे तीन दिवसीय वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत महोत्सव का गुरुवार को भव्य समापन हुआ। अंतिम दिन मां कुष्मांडा का स्वर्ण-जवाहर और रत्नाभूषणों से आकर्षक श्रृंगार किया गया। मां की मनोहारी छवि के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। मंदिर परिसर मां के जयकारों, घंटा-घड़ियाल और देवी गीतों से देर रात तक गूंजता रहा।
 

तीन दिवसीय वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत महोत्सव का भव्य समापन

12 घंटे चला अखंड भंडारा; 21 कलाकारों ने देवी गीतों से बांधा समां

स्वर्ण मुकुट, मोतियों की लड़ियां और रत्नाभूषणों से सजी मां की दिव्य छवि

मां के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, देर रात तक गूंजते रहे जयकारे

वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित भगवती मां कुष्मांडा मंदिर में चल रहे तीन दिवसीय वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत महोत्सव का गुरुवार को भव्य समापन हुआ। अंतिम दिन मां कुष्मांडा का स्वर्ण-जवाहर और रत्नाभूषणों से आकर्षक श्रृंगार किया गया। मां की मनोहारी छवि के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। मंदिर परिसर मां के जयकारों, घंटा-घड़ियाल और देवी गीतों से देर रात तक गूंजता रहा।

पंचामृत स्नान के बाद बनारसी लाल साड़ी में सजीं मां
मंदिर महंत पं. कौशलपति द्विवेदी और पं. संजय दुबे के सानिध्य में विधि-विधान से मां का पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद मां को बनारसी लाल साड़ी और लाल चुनरी धारण कराई गई। कोलकाता से मंगाए गए गुलाब और रजनीगंधा के फूलों से दरबार सजाया गया। दीपों की रोशनी और फूलों की सजावट के बीच मंदिर की छटा देखते ही बन रही थी।

मां को मांगटीका, नथिया, स्वर्ण मुकुट और विशेष फाटा हार धारण कराया गया। स्वर्ण-रजत युक्त मोतियों की लड़ियों और रत्नाभूषणों से किए गए श्रृंगार ने मां के स्वरूप को और भव्य बना दिया। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।

देवी गीतों और पचरा से भक्तिमय हुआ वातावरण
अंतिम दिन संगीत समारोह में पूर्वांचल के 21 कलाकारों ने देवी गीतों और लोकगीतों की प्रस्तुति देकर मां के चरणों में स्वरांजलि अर्पित की। गोपाल राय, विजय कपूर, भावना सिंह, कल्पना सिंह, विदुषी वर्मा, करिश्मा पांडेय, पीयूष मिश्र, ज्योति माही, पवन परदेशी, ममता शर्मा, नियति वर्मा, प्रियंका पांडेय और अंजली ऊर्वशी समेत कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं।

‘जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी...’, ‘अम्बे चरण कमल है तेरे...’, ‘कैसे नाही इठलाऊं मेरी मईया है आयी...’ और ‘लहरे लाहरदरवा कोहरवा...’ जैसे देवी गीतों और पचरा से माहौल भक्तिरस से भर गया। तबले पर मोतीलाल शर्मा, ढोलक पर सोनू, कीबोर्ड पर नीरज, रामाश्रय व शिवांश, पैड पर राहुल और बैंजो पर जियाराम ने संगत की।

12 घंटे चला अखंड भंडारा
मां की भोग आरती के बाद दोपहर 12 बजे अखंड भंडारा शुरू हुआ, जो रात 12 बजे तक लगातार चलता रहा। प्रसाद ग्रहण करने के लिए दोपहर से ही श्रद्धालुओं की कतार लग गई। शाम के बाद भीड़ और बढ़ती गई।

पं. विशेश्वर झा ‘सोनू’ ने बताया कि अखंड भंडारे में 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मां का भोग प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण करने के साथ मां के दरबार में मत्था टेककर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

तीन दिन तक भक्ति और संगीत में डूबा रहा दुर्गाकुंड
तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान मां कुष्मांडा मंदिर भक्ति और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहा। विभिन्न स्वरूपों के श्रृंगार, पूजन, आरती, भजन और लोकगीतों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण से जोड़े रखा। अंतिम दिन स्वर्णाभूषणों से सजी मां की छवि, देवी गीतों की स्वर लहरियां और अखंड भंडारे में उमड़ी भीड़ महोत्सव के समापन को खास बना गई। महोत्सव में कलाकारों का स्वागत कौशलपति द्विवेदी, बिंदु दुबे और सोनू झा ने किया। संयोजन एवं संचालन प्रभुनाथ राय ‘दाढ़ी’ ने किया।