एशियन गेम में भारत को स्थान दिलाने वाले सलमान खान के गांव में जश्न का माहौल

 










अमेठी, 24 सितंबर (हि.स.)। कभी परिवार का पेट पालने के लिए दिल्ली की सड़कों पर कैब चलाने वाला अमेठी का युवा आज एशियन गेम्स के पोडियम पर तिरंगे के साथ खड़ा है। तिलोई तहसील क्षेत्र के पूरे धिगईं मजरे खैरहना गांव निवासी सलमान खान ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में रोइंग की पुरुष डबल स्कल्स स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर अमेठी का नाम रोशन किया है।

सलमान खान और हरियाणा के सतनाम सिंह की भारतीय जोड़ी ने आइची-नगोया स्थित नागोया नदी के इंटरनेशनल रोइंग कोर्स में 6 मिनट 13 सेकंड 25 माइक्रोसेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। सलमान की इस उपलब्धि की खबर गुरुवार सुबह करीब पांच बजे गांव में परिजनों को मिली। इसके बाद से उनके घर और पूरे गांव में खुशी का माहौल है। लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दे रहे हैं और सलमान के घर पर लगातार शुभकामनाएं देने वालों का पहुंचना जारी है।

सलमान की बहन बुशरा बानो ने बताया कि यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनका सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। करीब 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने पिता मोहम्मद कासिम खान को डेंगू के कारण खो दिया था। पिता हरियाणा में ट्रक-बॉडी बनाने का काम करते थे और उनकी आमदनी से ही परिवार चलता था। पिता के निधन के बाद मां, दो बहनों और तीन छोटे भाइयों की जिम्मेदारी सलमान के कंधों पर आ गई। परिवार को हरियाणा छोड़कर अमेठी के पैतृक गांव लौटना पड़ा। उस समय परिवार के पास अपना मकान भी नहीं था और पिता के चाचा ने उन्हें अपने घर में सहारा दिया।

परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए सलमान दिल्ली चले गए, जहां उन्होंने ओला-उबर की कैब चलाई। कैब चलाकर परिवार के खर्च में मदद करने के साथ वह सेना में भर्ती होने की तैयारी भी करते रहे। बचा हुआ समय पढ़ाई और तैयारी में लगाते थे। आखिरकार वर्ष 2018 में उनका भारतीय सेना में चयन हो गया। वह सेना के बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप में शामिल हुए। सेना में प्रशिक्षकों ने उनकी शारीरिक क्षमता और खेल प्रतिभा को पहचाना और उन्हें रोइंग से जुड़ने का अवसर मिला।

रोइंग में सलमान का सफर भी आसान नहीं रहा। कठिन प्रशिक्षण और लगातार प्रतियोगिताओं के बीच उन्होंने दो बार खेल छोड़ने का विचार किया, लेकिन प्रशिक्षकों के भरोसे और अपनी मेहनत के दम पर वह आगे बढ़ते रहे। वर्ष 2023 में उन्हें टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम में शामिल किया गया। वर्ष 2024 में एशियन रोइंग कप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्हें भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर पदोन्नति मिली।

इसके बाद सलमान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2025 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियन रोइंग चैंपियनशिप और एशियन रोइंग चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया। वह 2023 वर्ल्ड रोइंग कप और 2024 ब्रिक्स गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी उनके नाम छह स्वर्ण और दो रजत पदक हैं। भोपाल में आयोजित 42वीं सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप-2025 में उन्होंने स्वर्ण, जबकि पुणे में आयोजित 43वीं सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।

एशियन गेम्स के फाइनल में सलमान और सतनाम ने शानदार शुरुआत की। भारतीय जोड़ी 500, 1000 और 1500 मीटर तक दूसरे स्थान पर बनी रही, लेकिन अंतिम 500 मीटर में रफ्तार कुछ कम होने के कारण तीसरे स्थान पर आ गई। चीन ने स्वर्ण और उज्बेकिस्तान ने रजत पदक जीता।

परिवार की जिम्मेदारी निभाते हुए सलमान ने अपनी दोनों बहनों बुसरा बानो और रिजवाना बानो की शादी कराई। अप्रैल 2025 में उन्होंने स्वयं भी विवाह किया। उनके छोटे भाई अदनान, नोमान और अयान अभी पढ़ाई कर रहे हैं। जिस परिवार के पास कभी अपना घर नहीं था, सलमान ने मेहनत और नौकरी के सहारे अपना घर बनवाया। अब उसी घर में एशियन गेम्स का कांस्य पदक जीतने वाले बेटे की सफलता का जश्न मनाया जा रहा है। कैब चालक से सैनिक और फिर अंतरराष्ट्रीय रोइंग खिलाड़ी बने सलमान खान की यह उपलब्धि खैरहना गांव से लेकर पूरे अमेठी के लिए खुशी और गौरव का अवसर बनी है।

हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश त्रिपाठी