विश्व योगासन चैंपियनशिप से योग को वैश्विक खेल बनाने की दिशा में मिली नई गति

 




अहमदाबाद, 06 जून (हि.स.)।

गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप 2026 सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक योग संस्कृति को वैश्विक खेल पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम बनकर उभरी है। इस आयोजन ने दुनिया भर के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और योग प्रेमियों को एक मंच पर लाकर योगासन को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में नई पहचान दी है।

एका एरिना में चल रही इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में 60 से अधिक देशों के 400 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। 13 वर्ष से लेकर 55 वर्ष तक के प्रतिभागी अपनी क्षमता, संतुलन, लचीलापन और शारीरिक नियंत्रण का प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच को भी इस आयोजन से मजबूती मिली है, जिसके तहत योगासन को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने और भविष्य में ओलंपिक खेलों में शामिल कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री ने योगासन को “मानवता के लिए भारत का कालातीत उपहार” बताया था।

प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुँची अर्जेंटीना की नबिला सोल बराज़ा ने कहा कि विश्व योगासन चैंपियनशिप उनके लिए एक अनोखा अनुभव रही है।

उन्होंने बताया कि भारत में बॉलीवुड में करियर बनाने के दौरान उन्होंने योगासन सीखा। नासिक और ऋषिकेश में प्रशिक्षण लेने के बाद वे अर्जेंटीना लौटीं और अब योगासन को अपने देश में आगे बढ़ा रही हैं। इस प्रतियोगिता में उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता।

दूसरी ओर, सिंगापुर के नेटवर्क इंजीनियर नथानियल टैन लियोंग एन इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले गैर-भारतीय खिलाड़ी बने। उन्होंने पारंपरिक योगासन वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया।

नथानियल ने कहा कि सिंगापुर में योगासन फिटनेस और मानसिक संतुलन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है और इस प्रतियोगिता ने विभिन्न देशों के खिलाड़ियों को एक-दूसरे से सीखने और जुड़ने का अवसर दिया है।

नीदरलैंड का प्रतिनिधित्व कर रहे भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. अमेया कृष्णा बी ने कहा कि यूरोप में योग को भारत की पहचान माना जाता है, लेकिन कई जगह इसे केवल फिटनेस गतिविधि तक सीमित कर दिया गया है। ऐसे में विश्व योगासन चैंपियनशिप योगासन के मानकीकरण और खेल स्वरूप को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल है।

वहीं मॉरीशस की चेतना रीशॉल ने कहा कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने से उन्हें पहली बार अपने देश से बाहर आने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि मॉरीशस में योगासन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और वहां स्कूल स्तर पर योग दिवस और प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा।

विश्व योगासन चैंपियनशिप ने यह संदेश दिया है कि योग अब केवल स्वास्थ्य और आध्यात्मिक अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में एक संगठित और प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में भी उभर रहा है।

विश्व योगासन संस्था वैश्विक स्तर पर योगासन के संचालन, नियमों के मानकीकरण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और विभिन्न आयु वर्गों में भागीदारी बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे