एशियाई खेल मिशन पर सरकार का बड़ा दांव, प्रणति नायक से धीरज बोम्मदेवरा तक खिलाड़ियों पर करोड़ों का निवेश

 




नई दिल्ली, 29 मई (हि.स.)। भारत सरकार पिछले कई वर्षों से टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के माध्यम से देश के शीर्ष खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी उपलब्ध करा रही है। ओलंपिक, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेल जैसे बड़े आयोजनों में भारत की पदक संभावनाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना अब भारतीय खेल व्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है।

वर्ष 2026 में सरकार ने विशेष रूप से आगामी एशियाई खेल (आइची-नागोया) और राष्ट्रमंडल खेल (ग्लासगो) को ध्यान में रखते हुए कई खिलाड़ियों और खेल दलों को बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता, विदेशी प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर और खेल विज्ञान सहयोग उपलब्ध कराया है। इसके साथ ही एशियाई खेलों के लिए “टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप” का गठन भी किया गया है, ताकि मजबूत पदक दावेदार खिलाड़ियों को अतिरिक्त सहयोग मिल सके।

प्रणति नायक पर विशेष फोकस

टोक्यो ओलंपियन जिमनास्ट प्रणति नायक उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्हें 2026 में लगातार सरकारी सहायता मिली है। वर्तमान में प्रणति भुवनेश्वर स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर में आयोजित सीनियर और जूनियर महिला आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स राष्ट्रीय कोचिंग शिविर का हिस्सा हैं। यह शिविर 22 मई से 20 जून तक आयोजित किया जा रहा है और चीन में होने वाली सीनियर एशियन चैंपियनशिप की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस शिविर पर कुल 23.52 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें 21 खिलाड़ी, कोच और सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं। इसके अलावा चीन में होने वाली प्रतियोगिता के लिए भारतीय महिला जिमनास्टिक्स दल को 36.59 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी मंजूर की गई है।

प्रणति को टॉप्स योजना के तहत व्यक्तिगत सहायता भी दी गई। उज्बेकिस्तान में आयोजित एफआईजी आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स वर्ल्ड चैलेंज कप में भाग लेने के लिए उनके, उनके कोच अशोक कुमार मिश्रा और फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. स्वेता अटिली के लिए 5.89 लाख रुपये मंजूर किए गए थे। प्रणति ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर भारत को सफलता दिलाई।

इसके अलावा ब्रिटेन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर और प्रतियोगिताओं के लिए टॉप्स द्वारा 75.65 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। हालांकि चोट के कारण प्रणति इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकीं।

तीरंदाजी खिलाड़ियों को भी मिल रहा व्यापक सहयोग

भारतीय तीरंदाजी टीम की तैयारियों को मजबूत करने के लिए भी खेल मंत्रालय लगातार निवेश कर रहा है। एशियाई खेल 2026 और आगामी विश्व कप प्रतियोगिताओं की तैयारी के तहत धीरज बोम्मदेवरा और ज्योति सुरेखा वेन्नम जैसे शीर्ष तीरंदाजों को टॉप्स योजना के अंतर्गत विशेष सहायता दी गई है।

रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मदेवरा को लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक चक्र में अब तक लगभग 66.28 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है। वहीं कंपाउंड तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम को करीब 24.56 लाख रुपये का सहयोग मिला है।

ज्योति को जर्मनी के बीटर आर्चरी सेंटर में विदेशी प्रशिक्षण शिविर के लिए भी सहायता प्रदान की गई। साथ ही उनकी मानसिक मजबूती और प्रतियोगी तैयारी को बेहतर बनाने के लिए खेल मनोवैज्ञानिक की सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

भारतीय तीरंदाजी टीम के लिए मार्च-अप्रैल 2026 में मैक्सिको में विशेष विदेशी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था, जिस पर 57.42 लाख रुपये खर्च किए गए। इसमें धीरज बोम्मदेवरा, ज्योति सुरेखा, दीपिका कुमारी और अतनु दास जैसे शीर्ष खिलाड़ी शामिल थे।

इसके अलावा सोनीपत स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र में 20 मई से 7 जून तक सीनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी शिविर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 16 शीर्ष तीरंदाज भाग ले रहे हैं। एशियाई खेलों से पहले भारतीय तीरंदाज जापान में विशेष एक्सपोजर कैंप में भी हिस्सा लेंगे।

टॉप्स योजना कैसे बदल रही भारतीय खेलों की तस्वीर

सितंबर 2014 में शुरू की गई टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना का उद्देश्य भारतीय खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। योजना के तहत खिलाड़ियों को मासिक भत्ता, विदेशी प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी, निजी कोच, फिजियोथेरेपिस्ट, खेल मनोवैज्ञानिक और आधुनिक उपकरणों की सुविधा दी जाती है।

वर्तमान में टॉप्स के तहत लगभग 98 कोर ग्रुप और 165 डेवलपमेंट ग्रुप खिलाड़ी सहायता प्राप्त कर रहे हैं। इनमें तीरंदाजी, मुक्केबाजी, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती और हॉकी जैसी प्रमुख खेल विधाओं के खिलाड़ी शामिल हैं।

सरकार का बढ़ता निवेश यह संकेत देता है कि भारत अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और ओलंपिक जैसे आयोजनों में अधिक से अधिक पदक जीतने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। खिलाड़ियों को दी जा रही यह निरंतर सहायता भारतीय खेलों के भविष्य को नई दिशा दे रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे