'मेरी सफलता पर शक करने वालों को गलत साबित करना था', कीर्ति ने सुनाई संघर्ष की कहानी

 


नई दिल्ली, 04 अक्टूबर (हि.स.)। एशियन गेम्स-2026 में स्वर्ण पदक जितने वाली भारतीय महिला रिकर्व टीम की हिस्सा रहीं कीर्ति शर्मा ने अपनी सफलता पर कहा कि उन्होंने ठान लिया था कि उनकी आलोचना करने वालों को गलत साबित करना है और उसके लिए उन्हें जो भी करना पड़े वह करेंगी।

कीर्ति शर्मा, अंकिता भगत और कुमकुम मोहोद की भारतीय महिला रिकर्व टीम ने एशियन गेम्स-2026 में इतिहास रच दिया। उन्होंने फाइनल में ताकतवर दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

हरियाणा के रितौली गांव के एक किसान परिवार में जन्मीं कीर्ति को बचपन से ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण और रूढ़िवादी माहौल में उन्हें खेलों में करियर बनाने को लेकर कई तरह की बातें सुननी पड़ीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

कीर्ति ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) मीडिया से बातचीत में कहा कि बचपन से ही उनकी सेहत ठीक नहीं रहती थी। उन्हें कई लोगों की नकारात्मक बातें सुननी पड़ती थीं, जो तीरंदाजी में उनके सफल होने की क्षमता पर शक करते थे। शारीरिक रूप से स्वस्थ न होने के कारण, शुरुआत में मुझे भारी पाउंड वाले धनुष उठाने में भी मुश्किल होती थी, लेकिन मैंने ठान लिया था कि अपनी आलोचना करने वालों को गलत साबित करने के लिए जो भी करना पड़े, मैं करूंगी।

उन्होंने यह लक्ष्य तब हासिल किया भारतीय तिकड़ी ने एशियन गेम्स-2026 में इतिहास रचा। फाइनल में 10 बार की चैंपियन दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर महिला रिकर्व टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत लिया। 19 साल की खिलाड़ी ने मुश्किल समय में साथ देने और अपनी सफलता की नींव रखने का श्रेय अपने परिवार, खासकर अपने पिता विजय शर्मा को दिया।

कीर्ति ने कहा कि मेरे पिता किसान हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया है और आर्थिक तंगी के बावजूद मेरे खेल करियर से जुड़े सभी खर्च उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने मेरे पिता से कहा कि उन्हें मुझे स्पोर्ट्स में नहीं जाने देना चाहिए, क्योंकि मैं एक लड़की हूं। उन्होंने मेरी खराब सेहत की वजह से मेरे सफल होने की क्षमता पर भी शक जताया, लेकिन मेरे पिता ने हमेशा मुझ पर भरोसा किया है।

हजारीबाग के साई ट्रेनिंग सेंटर में अभ्यास करने वाली आर्चर ने कहा कि एशियन गेम्स में कामयाबी का रास्ता बनाने का सारा श्रेय भारतीय खेल प्राधिकरण और उनके कोच उद्धव सिंह को जाता है।

कीर्ति ने कहा कि मेरे परिवार और कोच ने हमेशा मेरा साथ दिया है और मुझे यकीन दिलाया है कि मैं कमाल कर सकती हूं। मैंने साई हजारीबाग में ट्रायल इसलिए दिया क्योंकि मेरे कोच उद्धव सिंह का वहां स्थानांतरण हो गया था। शुरुआती वर्षों में मैं उद्धव सर की शुरू की गई एक अकादमी में अभ्यास करती थी।

उन्होंने कहा कि मैं चार साल पहले साई हजारीबाग गई थी। तब से मेरे करियर में जबरदस्त सुधार हुआ है। मैंने जो कुछ भी हासिल किया है, उसका श्रेय भारतीय खेल प्राधिकरण और कोच को जाता है। ---------------

हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह