एशियाई खेलों के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम रवाना, लॉस एंजिल्स ओलंपिक का सीधा टिकट लक्ष्य

 


बेंगलुरु, 08 सितंबर (हि.स.)।एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप बेल्जियम और नीदरलैंड्स 2026 में ऐतिहासिक पांचवां स्थान हासिल करने के बाद भारतीय महिला टीम मंगलवार को जापान के लिए रवाना हो गई। टीम का लक्ष्य एशियाई खेल आइची-नागोया 2026 में स्वर्ण पदक जीतने के साथ लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करना है। टीम की कप्तानी सलीमा टेटे कर रही हैं, जबकि मुख्य कोच की जिम्मेदारी सजॉर्ड मारिजने संभाल रहे हैं।

मारिजने की वापसी के बाद भारतीय महिला टीम ने फिटनेस, टीम के बीच तालमेल और मजबूत सामूहिक पहचान पर विशेष ध्यान दिया है। उनके मार्गदर्शन में भारत ने 2026 की शुरुआत एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप क्वालीफायर में रजत पदक के साथ की। टीम फाइनल तक अजेय रही और इटली को सेमीफाइनल में 1-0 से हराकर विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया।

इसके बाद भारत ने ऑकलैंड में एफआईएच महिला हॉकी नेशंस कप में शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने पूल चरण में अमेरिका, जापान और उरुग्वे को हराया। सेमीफाइनल में चिली को 6-0 से मात देने के बाद फाइनल में मेजबान न्यूजीलैंड को 2-0 से हराकर खिताब जीता। इस जीत के साथ भारत ने अगले सत्र की एफआईएच महिला हॉकी प्रो लीग में भी पदोन्नति हासिल की।

विश्व कप में भी भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और पांचवें स्थान पर रही, जो 1974 के पहले विश्व कप के बाद उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत को पूरे टूर्नामेंट में केवल एक हार मिली। टीम ने चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी ऊंची रैंकिंग वाली टीमों के खिलाफ ड्रॉ खेला, जबकि दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया। भारत ने विश्व कप का समापन विश्व नंबर पांच जर्मनी के खिलाफ 3-1 की जीत से किया।

अब भारतीय टीम की नजर एशियाई खेलों पर है, जहां दांव और भी बड़ा है। एफआईएच के लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक क्वालीफिकेशन नियमों के अनुसार, महिला हॉकी प्रतियोगिता में सबसे ऊंचे स्थान पर रहने वाली पात्र टीम को ओलंपिक कोटा स्थान मिलेगा, बशर्ते वह किसी अन्य माध्यम से पहले ही क्वालीफाई न कर चुकी हो। ऐसे में भारत के लिए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना सीधे ओलंपिक टिकट हासिल करने का रास्ता होगा।

भारत को पूल बी में जापान, थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया और उज्बेकिस्तान के साथ रखा गया है। भारतीय टीम 20 सितंबर को उज्बेकिस्तान के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। इसके बाद 21 सितंबर को इंडोनेशिया, 23 सितंबर को थाईलैंड, 25 सितंबर को जापान और 27 सितंबर को सिंगापुर से मुकाबला होगा। नॉकआउट चरण 30 सितंबर से शुरू होगा और इसी दिन सेमीफाइनल भी खेले जाएंगे। स्वर्ण पदक का मुकाबला 2 अक्टूबर को होगा।

कप्तान सलीमा टेटे ने कहा कि टीम हालिया सफलताओं से आत्मविश्वास से भरी है, लेकिन एशियाई खेलों में हर मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।

उन्होंने कहा, “हम एशियाई खेलों में काफी आत्मविश्वास के साथ जा रहे हैं, लेकिन हम यह भी जानते हैं कि हर टूर्नामेंट एक नई चुनौती लेकर आता है। नेशंस कप और विश्व कप ने हमें यह विश्वास दिया है कि हम एक टीम के रूप में क्या हासिल कर सकते हैं और अब हमारा ध्यान उससे एक कदम आगे बढ़ने पर है। हमारा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है—हम स्वर्ण पदक के लिए पूरी ताकत से लड़ना चाहते हैं और लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करना चाहते हैं। हम जानते हैं कि इसके लिए निरंतरता, अनुशासन और हर मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देना जरूरी होगा और एक टीम के रूप में हम इस चुनौती के लिए तैयार हैं।”

एशियाई खेलों के लिए 20 सदस्यीय भारतीय टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा प्रतिभाओं का भी अच्छा मिश्रण है। टीम में दो गोलकीपर सविता और बिचु देवी खरिबाम, पांच डिफेंडर इशिका चौधरी, सुशीला चानू पुखरामबम, लालथांतलुआंगी, ज्योति और शिल्पी डबास शामिल हैं।

मिडफील्ड में निक्की प्रधान, साक्षी राणा, सुनेलिता टोप्पो, कप्तान सलीमा टेटे, नेहा और दीपिका सोरेंग हैं। अग्रिम पंक्ति में लालरेमसियामी, रुतुजा दादासो पिसाल, नवनीत कौर, दीपिका, इशिका, बलजीत कौर और ब्यूटी डुंगडुंग को जगह मिली है।

नेशंस कप खिताब और पांच दशक से अधिक समय बाद विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बाद भारतीय महिला टीम के पास एशियाई खेलों में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने का सुनहरा मौका है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे