विश्व कप हिस्सेदारी बेचने की योजना की आलोचना के बाद फीफा ने सीओओ लामूर को हटाया

 


नई दिल्ली, 18 अगस्त (हि.स.)। विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा ने अपने मुख्य संचालन अधिकारी (सीओओ) केविन लामूर से नाता तोड़ लिया है। यह घटनाक्रम फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो की विश्व कप में हिस्सेदारी निवेशकों को बेचने की योजना की लामूर द्वारा आलोचना किए जाने के बाद सामने आया है।

फीफा के कर्मचारियों को संगठन के महासचिव मटियास ग्राफस्ट्रोम की ओर से ईमेल के जरिए इस फैसले की जानकारी दी गई। ईमेल में कहा गया कि फीफा और लामूर ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया है।

बीबीसी स्पोर्ट्स के अनुसार, फीफा के प्रवक्ता ने कहा, “मुख्य संचालन अधिकारी के रूप में फीफा और केविन लामूर के बीच कार्य संबंध 17 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया। फीफा उनकी दो साल की सेवाओं के लिए उनका धन्यवाद करता है और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता है।”

लामूर का जाना ऐसे समय हुआ है जब उन्होंने इन्फेंटिनो की विश्व कप की हिस्सेदारी निवेशकों को बेचने की योजना पर खुलकर सवाल उठाए थे। योजना को बाद में यूईएफए, एएफसी और कॉनकाकाफ समेत कई प्रमुख फुटबॉल संगठनों की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद इन्फेंटिनो ने छोड़ दिया था।

लामूर ने इस योजना को “एक व्यक्ति की परियोजना” करार दिया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि इस योजना को लेकर फीफा प्रशासन को “गुमराह” किया गया।

उन्होंने कहा था, “हमारा मिशन—फीफा के सैकड़ों समर्पित और जुनूनी कर्मचारियों का मिशन—फुटबॉल की सेवा करना है। एक अध्यक्ष को लोगों को साथ लाना, एकजुट करना और प्रेरित करना चाहिए। आज हम इसके विपरीत स्थिति का अनुभव कर रहे हैं।”

लामूर ने अपनी नौकरी जाने की संभावित आशंका पर भी स्पष्ट रुख अपनाया था। उन्होंने कहा था, “अगर इसका मतलब है कि मैं अपनी नौकरी खो दूंगा, तो ऐसा ही सही। मैं उस फैसले को समझूंगा और उसका सम्मान करूंगा। कम से कम उस रात मैं चैन से सो पाऊंगा।”

यूईएफए, एएफसी और कॉनकाकाफ ने जताया था विरोध

विश्व कप हिस्सेदारी बेचने की योजना को लेकर यूईएफए, कॉनकाकाफ और एएफसी ने भी फीफा पर गंभीर आरोप लगाए थे। तीनों संगठनों ने संयुक्त बयान में इसे “विश्वास का बुनियादी उल्लंघन” और “धोखे” का मामला बताया था।

संयुक्त बयान में कहा गया था कि मामला केवल किसी योजना का नहीं, बल्कि “खेल की गरिमा और उसे चलाने के लिए चुने गए लोगों की ईमानदारी” से जुड़ा है।

संगठनों ने यह भी कहा था कि फुटबॉल में नेतृत्व किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह पूरे फुटबॉल परिवार की सेवा करने की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, जब धोखे के जरिए भरोसा तोड़ा जाता है और कोई व्यक्ति उस सामूहिक संस्था से ऊपर खुद को रखता है जिसने उसे अधिकार सौंपा है, तो नेतृत्व की जिम्मेदारी का त्याग हो जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे