दबाव नहीं, जीत की ताकत बना आत्मविश्वास; भारतीय खिलाड़ियों ने साझा किया सफलता का मंत्र

 




नई दिल्ली, 29 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ी सिर्फ अपनी शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की ओर से जारी विशेष रिपोर्ट में खिलाड़ियों ने बताया कि बड़े मुकाबलों का दबाव उन्हें कमजोर नहीं, बल्कि और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है।

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता मीराबाई चानू ने भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) के हवाले से कहा कि उन्होंने कभी दबाव से डरना नहीं सीखा। जब भी वह भारत के लिए खेलती हैं तो दबाव उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने का माध्यम बन जाता है। मानसिक मजबूती और दबाव का गहरा संबंध है, इसलिए वह दबाव को सकारात्मक रूप में स्वीकार करती हैं।

ऊंची कूद में रजत पदक जीतने वाले सर्वेश कुशारे ने बताया कि कड़ी प्रतिस्पर्धा और ठंडे मौसम के बावजूद उन्होंने दबाव का आनंद लिया। साथी खिलाड़ी तेजस्विन शंकर के उत्साहवर्धन और अपने अनुभव की बदौलत वह इस महीने लगातार तीन बड़ी प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन कर सके।

ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहैन ने कहा कि शीर्ष स्तर पर सफलता के लिए दबाव को स्वीकार करना जरूरी है। वहीं ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा ने कहा कि भारत का प्रतिनिधित्व करते समय अपेक्षाओं का दबाव हमेशा रहता है, लेकिन वह इसे बोझ नहीं बल्कि आगे बढ़ने की प्रेरणा मानते हैं।

भारोत्तोलन में रजत पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी यादव ने बताया कि प्रतियोगिता से पहले वह भगवद्गीता का पाठ करती हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति और आत्मविश्वास मिलता है।

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष डॉ. पीटी उषा ने कहा कि दबाव हर खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा है। उन्होंने खिलाड़ियों को अपनी तैयारी पर भरोसा रखने और अपेक्षाओं से विचलित हुए बिना प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। सच्चे चैंपियन वही होते हैं जो दबाव से भागते नहीं, बल्कि उसी के बीच सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं।

आईओए के अनुसार ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में जैसे-जैसे प्रतियोगिताएं आगे बढ़ेंगी, दबाव भी बढ़ेगा। ऐसे में मानसिक मजबूती ही खिलाड़ियों को पदक तक पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी।

-----------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे