आईसीसी ने लॉर्ड्स और गद्दाफी स्टेडियम की पिच को बताया असंतोषजनक
-दोनों मैदानों को एक-एक डिमेरिट अंक
नई दिल्ली, 09 जून (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने इंग्लैंड-न्यूज़ीलैंड के बीच खेले गए पहले टेस्ट में इस्तेमाल की गई लॉर्ड्स की पिच तथा पाकिस्तान-ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरे एकदिवसीय मुकाबले के लिए इस्तेमाल की गई लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम की पिच को ‘असंतोषजनक’ करार दिया है। इसके साथ ही दोनों मैदानों को आईसीसी की पिच और आउटफील्ड निगरानी प्रक्रिया के तहत एक-एक डिमेरिट अंक दिया गया है।
लॉर्ड्स टेस्ट के मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट और गद्दाफी स्टेडियम के मैच रेफरी ग्रेम ला ब्रॉय ने अपनी रिपोर्ट में अंपायरों और दोनों टीमों के कप्तानों की चिंताओं को दर्ज किया।
लॉर्ड्स की पिच पर टिप्पणी करते हुए पाइक्रॉफ्ट ने कहा कि पूरे टेस्ट के दौरान गेंद में जरूरत से ज्यादा सीम मूवमेंट देखने को मिली और कई मौकों पर गेंद असामान्य रूप से नीचे रही। उन्होंने कहा,“पूरे मुकाबले में उछाल लगातार समान नहीं रही। पहले दिन 16 और दूसरे दिन 17 विकेट गिरे। पिच पूरी तरह गेंदबाजों के पक्ष में झुकी हुई थी, जिससे बल्लेबाजों के लिए संतुलित प्रतिस्पर्धा नहीं बन सकी।”
वहीं, गद्दाफी स्टेडियम की पिच को लेकर ग्रेम ला ब्रॉय ने कहा कि पिच काफी धीमी और नीची थी, जिससे रन बनाना बेहद कठिन हो गया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा, “यह पिच एकदिवसीय क्रिकेट के अनुकूल नहीं थी क्योंकि बल्लेबाजों को सेट होने में अधिक समय लग रहा था। मैच के शुरुआती चरण से ही स्पिन को मदद मिलनी शुरू हो गई थी और यह स्थिति पूरे मुकाबले में बनी रही।”
आईसीसी ने दोनों रिपोर्ट संबंधित बोर्ड- इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भेज दी हैं। दोनों बोर्ड के पास फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 14 दिनों का समय होगा।
आईसीसी नियमों के अनुसार डिमेरिट अंक पांच वर्षों तक सक्रिय रहते हैं। किसी मैदान के छह डिमेरिट अंक होने पर उसे 12 महीने तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की मेजबानी से निलंबित किया जा सकता है। वहीं, 12 अंक होने पर यह प्रतिबंध 24 महीने तक बढ़ सकता है।
हालांकि राहत की बात यह है कि लॉर्ड्स और गद्दाफी स्टेडियम, दोनों मैदानों के खाते में इससे पहले कोई डिमेरिट अंक दर्ज नहीं था।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे