नीरज चोपड़ा बने आईओए के एंटी-डोपिंग अभियान का चेहरा

 


नई दिल्ली, 19 जून (हि.स.)। भारत के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने भारतीय खेलों को डोपिंग मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के साथ मिलकर एक विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य खिलाड़ियों को प्रदर्शन बढ़ाने वाली प्रतिबंधित दवाओं के खतरों के प्रति जागरूक करना और स्वच्छ खेल संस्कृति को बढ़ावा देना है।

इस पहल की घोषणा आईओए एथलीट्स फोरम के दूसरे संस्करण के दौरान की गई। इस अवसर पर आईओए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रघुराम अय्यर ने बताया कि भारतीय ओलंपिक संघ और नीरज चोपड़ा फाउंडेशन के बीच क्लीन स्पोर्ट्स अभियान के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

कार्यक्रम में दोहा में मौजूद नीरज चोपड़ा का वीडियो संदेश भी चलाया गया। अपने संदेश में उन्होंने युवा खिलाड़ियों से धैर्य रखने और सफलता के लिए किसी भी प्रकार के शॉर्टकट से बचने की अपील की।

नीरज ने कहा, “मैंने देखा है कि कई युवा खिलाड़ी जल्दी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के लिए डोपिंग का सहारा लेना चाहते हैं लेकिन मेरी यात्रा इसका उदाहरण है कि ओलंपिक पदक जीतने में मुझे 10 साल लगे। खेलों में सफलता के लिए धैर्य बेहद जरूरी है।”

उन्होंने कहा कि आज के समय में खिलाड़ियों में धैर्य की कमी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा, “बच्चे बहुत जल्दी परिणाम चाहते हैं। कोई एक साल में ही 80 मीटर पार करना चाहता है, जबकि ऐसे स्तर तक पहुंचने में कई वर्षों की मेहनत लगती है।”

यह अभियान ऐसे समय में शुरू किया गया है जब भारत लगातार तीसरे वर्ष विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) की वार्षिक सूची में सर्वाधिक डोपिंग मामलों वाले देशों में शामिल रहा है। हाल ही में एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट ने भारत को डोपिंग के लिहाज से उच्च जोखिम वाला देश भी बताया था।

इस अभियान का उद्देश्य खिलाड़ियों को एंटी-डोपिंग नियमों की बेहतर जानकारी देना, अनजाने में होने वाले उल्लंघनों को कम करना और खेलों में निष्पक्षता व ईमानदारी की संस्कृति को मजबूत करना है।

आईओए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रघुराम अय्यर ने बताया कि इस पहल के तहत खिलाड़ियों की कहानियों, डिजिटल शिक्षण सामग्री, कार्यशालाओं और जमीनी स्तर के कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता फैलाई जाएगी।

नीरज चोपड़ा ने कहा, “मेरे खेल जीवन ने मुझे सिखाया है कि सफलता रातोंरात नहीं मिलती। यह वर्षों की मेहनत, अनुशासन और सही दिशा में लगातार प्रयास का परिणाम होती है। स्वच्छ खेल केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के लिए ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करना भी है, जहां वे सप्लीमेंट और प्रदर्शन के दबाव से जुड़े सवाल खुलकर पूछ सकें।”

आईओए अध्यक्ष पीटी उषा ने बताया कि इस अभियान को लेकर पिछले छह महीनों से चर्चा चल रही थी और इसके लिए उन्होंने नीरज चोपड़ा की पहल की सराहना की।

उन्होंने कहा, “नीरज एक प्रेरणास्रोत हैं। खिलाड़ियों को उन पर विश्वास करना चाहिए क्योंकि उन्होंने मेहनत के दम पर ओलंपिक पदक जीता है। डोपिंग अस्थायी है, लेकिन मेहनत स्थायी सफलता देती है। हम इस पहल को पूरा समर्थन दे रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि साल 2023 में स्थापित नीरज चोपड़ा फाउंडेशन खेल अवसंरचना, युवा खिलाड़ियों को सहयोग तथा खेल विज्ञान, पोषण और चोट से बचाव जैसे क्षेत्रों में संसाधन उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे