एशियाई पैरा खेल: चक्का फेंक में भारत का क्लीन स्वीप, देवेंद्र ने स्वर्ण, राकेश को रजत और प्रदीप ने जीता कांस्य

 


नागोया, 20 अक्टूबर (हि.स.)। भारत ने पांचवें एशियाई पैरा खेल-2026 में पुरुषों की चक्का फेंक स्पर्धा में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए तीनों पदक अपने नाम किए। देवेन्दर कुमार ने स्वर्ण, राकेश ने रजत और प्रदीप कुमार ने कांस्य पदक जीतकर भारतीय तिरंगे का मान बढ़ाया। यह मुकाबला एफ-43, एफ-44, एफ-62 और एफ-64 वर्गों के खिलाड़ियों के बीच आयोजित किया गया।

हरियाणा के चरखी दादरी जिले के किशकंधा गांव के रहने वाले देवेन्दर कुमार ने 49.71 मीटर दूर चक्का फेंककर 781 रजा अंक हासिल किए और स्वर्ण पदक जीता। एफ-44 वर्ग में प्रतिस्पर्धा कर रहे देवेन्दर का खेलों में यह शानदार प्रदर्शन रहा। उनके पिता धर्मेंद्र पूर्व सैनिक और राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल खिलाड़ी रहे हैं। देवेन्दर भी बचपन से वॉलीबॉल और चक्का फेंक में रुचि रखते थे तथा वॉलीबॉल में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। 21 वर्ष की उम्र में एक दुर्घटना में उनका बायां पैर टूट गया और कूल्हे में कई फ्रैक्चर हुए। दो महीने अस्पताल में रहने के बाद उन्होंने परिवार और दोस्तों के सहयोग से खेल में वापसी की। वर्ष 2019 में उन्होंने ओपन राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता और उसी वर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया। वह 2022 के एशियाई पैरा खेलों में भी स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। उनके प्रशिक्षक संदीप कुमार हैं।

एफ-44 वर्ग के राकेश ने 49.45 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ 771 रजा अंक हासिल कर रजत पदक जीता। उन्होंने इस स्पर्धा में भारत की स्वर्णिम सफलता को दोहरे पदक से आगे बढ़ाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राकेश ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अभ्यास के दम पर अपनी पहचान बनाई है। एशियाई पैरा खेल-2026 में उनका रजत पदक भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा।

उत्तर प्रदेश के प्रदीप कुमार ने एफ-64 वर्ग में 51.15 मीटर दूर चक्का फेंककर कांस्य पदक हासिल किया। उन्हें 669 रजा अंक मिले। हालांकि, उनका थ्रो दूरी के लिहाज से सबसे लंबा रहा, लेकिन वर्गीकरण आधारित अंक प्रणाली के कारण वह तीसरे स्थान पर रहे। प्रदीप की उपलब्धियों में वर्ष 2022 के एशियाई पैरा खेलों में भाला फेंक एफ-54 स्पर्धा का रजत पदक और 2026 की राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक शामिल हैं। उन्होंने लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के बाद पैरा खेलों के माध्यम से अपनी जिंदगी को नई दिशा दी। शुरुआत में उन्होंने व्हीलचेयर रग्बी अपनाया, फिर पैरा एथलेटिक्स से जुड़े। वह दिव्यांगजनों को खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित भी करते हैं।

इंडोनेशिया के रेजा अंगिन 40.40 मीटर के प्रयास और 484 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहे। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने एशियाई पैरा खेलों में देश की पदक उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे