एशियाई पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की पोशाक में दिखी 5000 साल पुरानी सभ्यता की झलक
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (हि.स.)। जापान के आइची-नागोया में शनिवार को पांचवें एशियाई पैरा खेलों के उद्घाटन समारोह में भारतीय दल की पोशाक ने देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की। भारतीय खिलाड़ियों ने विशेष रूप से तैयार ब्लेजर पहने, जिन पर सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों, सप्तसिंधु और तिरंगे को स्थान दिया गया है। यह पोशाक भारत की लगभग 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक पहचान को समर्पित है।
भारतीय दल के ब्लेजर पर सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों के चित्र और प्राचीन आकृतियां उकेरी गई हैं। ये दुनिया की प्राचीनतम सभ्यताओं में शामिल सिंधु घाटी सभ्यता की पहचान और उसकी कलात्मक विरासत को दर्शाती हैं।
ब्लेजर के कॉलर पर सप्तसिंधु को स्थान दिया गया है, जो सात नदियों की पवित्र भूमि और सरस्वती नदी की विरासत का प्रतीक है। वहीं, ब्लेजर की जेब पर दिल के करीब भारतीय तिरंगे को लगाया गया है, जो देश के प्रति गौरव और समर्पण का संदेश देता है।
281 सदस्यीय भारतीय दल ले रहा हिस्सा
पांचवें एशियाई पैरा खेलों में भारत 281 सदस्यीय दल उतार रहा है। इसमें 168 खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें 112 पुरुष और 56 महिलाएं हैं। भारतीय खिलाड़ी 11 खेलों में पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। प्रतियोगिता 18 से 24 अक्टूबर तक आयोजित की जा रही है, जिसमें 45 देशों के करीब 3000 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इन खेलों का ध्येय वाक्य ‘इमैजिन वन हार्ट’ है।
भारतीय दल की यह पोशाक केवल उद्घाटन समारोह तक सीमित औपचारिक परिधान नहीं बल्कि देश की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाने का प्रयास है। सिंधु घाटी सभ्यता की प्राचीन मुहरों से लेकर नागोया के खेल मैदानों तक भारतीय पैरा खिलाड़ी अपनी विरासत, दृढ़ संकल्प और खेल भावना के साथ देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे