पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप: उम्रदराज महिला खिलाड़ियों का जज्बा लोगाें को कर रहा प्रेरित
धमतरी, 01 अगस्त (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के धमतरी में आयाेजित पावर लिफ्टिंग में दूर-दूर से पहुंचे खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। आयोजन का आकर्षण मनेंद्रगढ़ की 72 वर्षीय कमला देवी मंगतानी और चिरमिरी की 57 वर्षीय संजीदा खातून बनी हुई हैं जो 12 वीं छत्तीसगढ़ राज्य पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने पहुंचीं हैं। दोनों खिलाड़ी रविवार को बारबेल पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगी। उम्र और जीवन की कठिन चुनौतियों को पीछे छोड़कर खेल में बनाई गई उनकी पहचान प्रतियोगिता का सबसे प्रेरणादायी पहलू बन गई है। इनका प्रदर्शन देखने खेल प्रेमियों की भीड़ जुटेगी।
पावर लिफ्टिंग संघ धमतरी के तत्वावधान में अग्रसेन भवन सिहावा चौक में आयोजित तीन दिवसीय 12 वीं छत्तीसगढ़ राज्य पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में प्रदेशभर के 400 से 500 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता में सब जूनियर, जूनियर, सीनियर और मास्टर वर्ग के महिला एवं पुरुष खिलाड़ी इक्विप्ड और क्लासिक श्रेणी में स्क्वाट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट स्पर्धाओं में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं।
शुक्रवार को राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डा. ममता साहू ने प्रतियोगिता का आरंभ कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। वहीं रविवार को समापन समारोह में नगर निगम धमतरी के महापौर रामू रोहरा शामिल होंगे। शनिवार को आयोजित प्रतियोगिता में पावर लिफ्टिंग खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन रहा। महिला वर्ग में 47 किलोग्राम भार वर्ग में अंजना सिंह, 57 किलोग्राम में मधु अहीर और 63 किलोग्राम में सृष्टि विभार ने प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं पुरुष वर्ग में 66 किलोग्राम भार वर्ग में संस्कार चौहान, 74 किलोग्राम में एम. अमिताभ एवं 83 किलोग्राम में प्रीतपाल तांडी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस दौरान आयोजक टीम के संरक्षक डा विकास अग्रवाल, सचिव देवेंद्र यादव, अध्यक्ष लोकेश पवार, भारत पावर लिफ्टिंग संघ के अध्यक्ष सत्यप्रकाश मसीह, महासचिव तेजा सिंह साहू, कोषाध्यक्ष हरिनाथ, टिक्की निर्मलकर सहित पावर लिफ्टिंग खिलाड़ी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
मनेंद्रगढ़ की 72 वर्षीय कमला देवी मंगतानी ने 65 वर्ष की उम्र में पावर लिफ्टिंग की शुरुआत की। उस समय वह घुटनों के दर्द, शुगर और ब्लड प्रेशर से परेशान थी। डाक्टरों ने घुटना प्रत्यारोपण की सलाह दी थी। उन्होंने नियमित वाक और जिम जाना शुरू किया, जहां कोच अमित टोप्पो ने उन्हें पावर लिफ्टिंग के लिए प्रेरित किया। पहली ही जिला स्तरीय प्रतियोगिता में उन्होंने स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके बाद उनका सफर लगातार आगे बढ़ता गया। अब तक वह 30 से अधिक राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के साथ नेपाल, दुबई और पोखरा की अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में हिस्सा ले चुकी हैं। उनके नाम 100 से अधिक पदक हैं, जिनमें 75 स्वर्ण पदक शामिल हैं। कमला देवी का कहना है कि नियमित अभ्यास ने उन्हें नई पहचान के साथ स्वस्थ जीवन भी दिया है।
चिरमिरी की 57 वर्षीय संजीदा खातून के लिए पावर लिफ्टिंग केवल खेल नहीं, बल्कि जिंदगी को नया अर्थ देने वाली राह बनी। स्तन कैंसर, थायराइड, माइग्रेन, स्पाइन डिस्क और अन्य गंभीर बीमारियों के बीच उनके आठ आपरेशन हुए। इसी दौर में दिव्यांग कोच धर्मेंद्र दास ने उन्हें फिटनेस अपनाने की प्रेरणा दी। बेटी शेख अलिशा के एक वाक्य जिंदगी बहुत बड़ी है, आपको मेरे लिए जीना पड़ेगा ने उनका जीवन बदल दिया। उन्होंने खानपान में बदलाव कर तीन महीने में 24 किलो वजन कम किया और पावर लिफ्टिंग शुरू की। आज वह 12 बार स्ट्रांग वूमेन का खिताब जीत चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर पांच बार यह सम्मान हासिल कर चुकी हैं। योग और एथलेटिक्स में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी संजीदा अब महिलाओं और बालिकाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा