बालोगुन का निलंबन हटाने पर फीफा घिरा, ला लीगा अध्यक्ष बोले- यह बड़ी समस्या का छोटा हिस्सा
मैड्रिड, 07 जुलाई (हि.स.)। स्पेनिश फुटबॉल लीग ला लीगा के अध्यक्ष जावियर तेबास ने अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगाए गए एक मैच के विश्व कप प्रतिबंध को फीफा द्वारा वापस लेने के फैसले की तीखी आलोचना की। उन्होंने इसे विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला बताते हुए कहा कि यह केवल बड़ी समस्या का एक छोटा हिस्सा है।
अमेरिका और बोस्निया-हर्जेगोविना के बीच फीफा विश्व कप के राउंड ऑफ-32 मुकाबले में बालोगुन को वीएआर समीक्षा के बाद बोस्नियाई डिफेंडर तारिक मुहरेमोविच पर खतरनाक चुनौती के लिए सीधा लाल कार्ड दिखाया गया था। इसके चलते उन पर स्वतः एक मैच का निलंबन लगा था।
हालांकि बाद में फीफा ने इस प्रतिबंध को एक वर्ष की परिवीक्षा अवधि के लिए स्थगित कर दिया, जिससे बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में खेलने की अनुमति मिल गई। इसके बावजूद अमेरिका को 4-1 से हार का सामना करना पड़ा और उसकी विश्व कप यात्रा समाप्त हो गई।
जावियर तेबास ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी बयान में कहा कि यह केवल एक अनुशासनात्मक फैसला नहीं, बल्कि फीफा की शासन प्रणाली की गहरी खामियों का उदाहरण है। उन्होंने कहा, बालोगुन पर लगे प्रतिबंध को हटाना कोई मामूली घटना या अलग-थलग गलती नहीं है। यह उस प्रशासनिक मॉडल का सिर्फ हिमखंड का सिरा है, जिसने वर्षों से फीफा और विश्व फुटबॉल की विश्वसनीयता को कमजोर किया है।
तेबास ने आरोप लगाया कि फीफा अक्सर अपनी सुविधा के अनुसार नियमों की व्याख्या या उनमें बदलाव करता है और राष्ट्रीय तथा घरेलू लीगों से वास्तविक संवाद किए बिना महत्वपूर्ण फैसले लेता है। उन्होंने कहा कि जब नियमों को मनमाने ढंग से लागू किया जाता है और बड़े निर्णय पहले से तय होते हैं, तो संस्थाओं पर से विश्वास उठ जाता है।
ला लीगा अध्यक्ष ने फीफा कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वहां वास्तविक बहस नहीं होती और अधिकांश फैसले मतदान से पहले ही तय कर लिए जाते हैं। उनके अनुसार, ऐसे निर्णय लगातार घरेलू लीगों के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
तेबास ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि विश्व फुटबॉल को ऐसी संस्थाओं की जरूरत है जो नियमों का सम्मान करें, निष्पक्ष ढंग से निर्णय लें और प्रशंसकों, खिलाड़ियों, क्लबों तथा लीगों का विश्वास बनाए रखें।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय