सड़क अवसंरचना के लिए उत्तराखंड को सात हजार करोड़ रूपये देगी केंद्र सरकार

 


-नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ मुख्यमंत्री धामी ने की बैठक

नई दिल्ली, 30 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ एक बैठक कर उत्तराखण्ड से संबंधित सड़क एवं अवसंरचना विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया। इस बैठक में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड की सड़क अवसंरचना के लिए सात हजार करोड़ रूपये देने पर सहमति जताई है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक व रणनीतिक महत्ता, तीर्थाटन, पर्यटन व आपदा प्रबंधन की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए राज्य में सुदृढ़ और आधुनिक सड़क नेटवर्क के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य के लंबित प्रस्तावों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय का अनुरोध किया।

सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर एक पोस्ट कर मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि के अंतर्गत वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार को लगभग 750 करोड़ लागत की परियोजनाओं की स्वीकृति पर सहमति दे दी है। इसके साथ ही एनओएच के अंतर्गत पांच प्रमुख परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग रूपये 2966 करोड़ है। इनमें श्रीनगर बाईपास का पीएमसी, पुरकाजी–लक्सर–हरिद्वार मार्ग की चार-लेनिंग, लोहाघाट व पिथौरागढ़ बाईपास एलाइनमेंट, मझोला से खटीमा के आबादी भाग में चार-लेन विस्तार व रामनगर–रानीखेत (मोहन) मार्ग का सुदृढ़ीकरण प्रमुख रूप से शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025-26 तक की रूपये 530.11 करोड़ की लंबित प्रतिपूर्ति राशि शीघ्र अवमुक्त किए जाने तथा का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने आगामी अर्धकुंभ मेला 2027 के दृष्टिगत हरिद्वार बाईपास परियोजना को समयबद्ध रूप से पूर्ण किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे यातायात दबाव में कमी आएगी तथा श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुगम आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री ने कोटद्वार बाईपास परियोजना के कार्यों में भी तेजी लाने का अनुरोध किया, जिससे क्षेत्रीय यातायात व्यवस्था सुगम हो सके तथा स्थानीय जनता को जाम की समस्या से राहत मिले। दोनों ही प्रस्तावों को सहमति दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि नेशनल हाईवे के माध्यम से अन्य मार्गों के संयोजन के लिए कुछ परियोजनाओं के लिए लगभग 3 हजार करोड़ की सैद्धांतिक सहमति देने का अनुरोध किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक सहमति व्यक्त की। इसके अतिरिक्त अल्मोड़ा सिकुड़ा बैंड से एनएच-309 तक टनल सहित मोटर मार्ग निर्माण के लिए लगभग रूपये 300 करोड़ की परियोजना पर चर्चा और सैद्धान्तिक सहमति बन गई।

इसके अलावा राज्य में आपदा प्रबन्धन के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड लैंडस्लाइड मिटिगेशन मैनेजमेंट सेंटर के माध्यम से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में उपचारात्मक कार्यों के लिए डीपीआर तैयार किए जाने के लिए अनुबंध करने का अनुरोध किया, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी एवं वैज्ञानिक समाधान सुनिश्चित हो सके। मंत्रालय द्वारा इसे स्वीकृत किया गया है ।

मुख्यमंत्री ने सीमा सड़क संगठन से संबंधित लंबित मामलों, विशेषकर ऋषिकेश–गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के हिना–तेखला–नेताला–गरमपानी खंड की डीपीआर तथा जोशीमठ बाईपास मार्ग के संशोधित प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान किए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यंत कम दरों पर प्राप्त निविदाओं के मामलों में अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की वर्तमान व्यवस्था में आवश्यक संशोधन किया जाए, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण एवं स्लोप ट्रीटमेंट कार्य समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्र सरकार के सहयोग से इन सभी परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन से उत्तराखण्ड में सड़क संपर्क एवं आधारभूत संरचना को नई मजबूती मिलेगी। इससे सीमांत क्षेत्रों का विकास, पर्यटन को बढ़ावा, आपदा प्रबंधन क्षमता में वृद्धि तथा राज्य की आर्थिक प्रगति को गति प्राप्त होगी।

बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, सचिव लोक निर्माण विभाग डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सचिव सड़क परिवहन बृजेश कुमार संत, स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा आदि मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल