रेल सुरक्षा में बड़ा सुधार, चालू वित्त वर्ष में अब तक केवल दो बड़ी रेल दुर्घटनाएं; 2,569 रूट किलोमीटर पर लागू हुआ कवच 4.0
नई दिल्ली, 29 जुलाई (हि.स.)। भारतीय रेलवे ने कहा है कि सुरक्षा उपायों, आधुनिक प्रौद्योगिकी, बेहतर बुनियादी ढांचे और उन्नत रखरखाव व्यवस्था के कारण रेल दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2026-27 में जून तक केवल दो गंभीर रेल दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जबकि 2014-15 में इनकी संख्या 135 थी। इसी अवधि में दुर्घटना सूचकांक भी घटकर 0.01 रह गया है। रेलवे ने दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रेल मार्गों पर स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच 4.0 को 2,569 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक लागू कर दिया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि वर्ष 2025-26 में कांसिक्वेंशल रेल दुर्घटनाओं की संख्या घटकर 16 रह गई, जो 2014-15 की तुलना में 88 प्रतिशत कम है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में जून तक केवल दो ऐसी दुर्घटनाएं हुई हैं। दुर्घटना सूचकांक भी 2014-15 के 0.11 से घटकर 2025-26 में 0.01 रह गया, जो 91 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि रेलवे में सुरक्षा संबंधी व्यय लगातार बढ़ाया गया है। वर्ष 2013-14 में यह 39,200 करोड़ रुपये था, जो 2026-27 के बजट में बढ़कर 1.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। रेलवे ने 6,671 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और पूर्ण ट्रैक सर्किटिंग, 10,395 लेवल क्रॉसिंग पर इंटरलॉकिंग, आधुनिक रेल पटरियों, लंबी रेल पैनलों, अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन, ट्रैक रिकॉर्डिंग प्रणाली तथा अन्य तकनीकों को अपनाकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है।
रेल मंत्री ने कहा कि जनवरी 2019 तक ब्रॉड गेज नेटवर्क से सभी मानव रहित रेलवे फाटकों को समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा एलएचबी कोचों का निर्माण, रेलवे पुलों का नियमित निरीक्षण, अग्नि सुरक्षा प्रणाली, आधुनिक सिग्नलिंग, ट्रैक मशीनों के उपयोग और कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण जैसे कदम भी सुरक्षा बढ़ाने में सहायक रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कवच भारत में विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जो लोको पायलट द्वारा निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं करने पर स्वत: ब्रेक लगाकर दुर्घटनाओं की संभावना कम करती है। जुलाई 2024 में स्वीकृत कवच संस्करण 4.0 में बेहतर लोकेशन सटीकता, बड़े यार्डों में सिग्नल की अधिक सटीक जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली के साथ सीधा समन्वय जैसी नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं।
वैष्णव ने कहा कि इस वर्ष 20 जुलाई तक देश के सबसे व्यस्त रेल मार्ग दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा पर कुल 2,569 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 का सफलतापूर्वक संचालन शुरू हो चुका है। इसके अलावा 21,858 रूट किलोमीटर पर ट्रैक साइड कवच कार्य प्रगति पर है। अब तक 11,253 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है, 1,668 दूरसंचार टावर स्थापित किए गए हैं, 988 स्टेशन डेटा सेंटर विकसित किए गए हैं तथा 6,153 इंजनों में कवच प्रणाली लगाई जा चुकी है। इसके अलावा 7,327 इंजनों और 1,200 ईएमयू/एमईएमयू रेक में भी कवच लगाने का कार्य जारी है।
उन्होंने बताया कि अब तक 94 हजार से अधिक तकनीशियनों, इंजीनियरों और परिचालन कर्मचारियों को कवच प्रणाली का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें लगभग 57 हजार लोको पायलट और सहायक लोको पायलट शामिल हैं। इस साल जून तक कवच परियोजना पर 3,874 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए 2,066 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। रेलवे का कहना है कि देशभर में कवच परियोजना का विस्तार तेज गति से किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार