भविष्य के युद्धों में तकनीक और संयुक्त सैन्य क्षमता होगी निर्णायक : जनरल अनिल चौहान

 


देहरादून, 12 जुलाई (हि. स.)। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भविष्य के युद्धों में तकनीक, संयुक्त सैन्य क्षमता और बहु-आयामी रणनीति निर्णायक भूमिका निभाएगी। बदलते युद्ध स्वरूप के अनुरूप सशस्त्र बलों को लगातार तैयार करना और नई तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है।

रविवार को सैनिक संस्थान गढ़ी कैंट में ऑल इंडिया गोरखा एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आयोजित सम्मान एवं अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए अनिल चौहान ने कहा कि वह 47 वर्ष की सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं।

उनका सीडीएस के रूप में कार्यकाल अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा।

उन्होंने कहा कि सैनिक हमेशा युद्ध नहीं लड़ता, बल्कि अधिकांश समय युद्ध की तैयारी, रणनीति निर्माण और विभिन्न विकल्पों के साथ समन्वय की तैयारी में लगा रहता है। उन्होंने कहा कि युद्ध में जीत ही लक्ष्य होती है और पराजय कोई विकल्प नहीं है।

उन्होंने कहा कि मई 2025 में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष में भारत की सफलता एक बड़ी उपलब्धि रही। ऑपरेशन सिंदूर संयुक्त सैन्य संचालन, एकीकरण और समन्वित रणनीति का उदाहरण था, जिसकी तैयारी तीन वर्ष पहले से की गई थी। युद्ध में जल, थल और वायु सेनाओं के साथ-साथ अंतरिक्ष (स्पेस) और साइबर क्षेत्र की क्षमताओं का भी प्रभावी उपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता भारतीय सशस्त्र बलों के लिए संतोषजनक रही।

जनरल चौहान ने कहा कि भविष्य के युद्धों में नई तकनीकों को अपनाना अनिवार्य होगा। प्रत्येक युद्ध अलग होता है और उसके अनुरूप नई रणनीति विकसित करनी पड़ती है। सेना को निरंतर नई तकनीक सीखने और स्वयं को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढालने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है और सैन्य व्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रह सकती। देशवासियों का सशस्त्र बलों के प्रति विश्वास और स्नेह उनकी सबसे बड़ी धरोहर है। यह सम्मान किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि संस्था के प्रति होता है। इसलिए प्रत्येक सैनिक को अपने कर्तव्य, अनुशासन, ईमानदारी और निष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश में सामरिक सोच (स्ट्रैटेजिक थिंकिंग) को बढ़ावा देने की आवश्यकता है और इसकी आवाज उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों से भी उठनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमालय की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा सदियों से देश को दिशा देती रही है और उत्तराखंड से निकला चिंतन पूरे देश को नई दृष्टि प्रदान कर सकता है।

उन्होंने कहा कि सही और गलत का निर्णय व्यक्ति का अंतर्मन करता है। सेना, राजनीति अथवा किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व पर विश्वास रखते हुए नैतिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने देहरादून को अपना स्थायी निवास बनाया है और भविष्य में भी उत्तराखंड और यहां के लोगों से जुड़े रहना चाहते हैं।

समारोह में ऑल इंडिया गोरखा एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन ने जनरल अनिल चौहान का सम्मान किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री एवं गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष ज्योति कोटिया, ऑल इंडिया गोरखा एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कर्नल आर.एस. क्षेत्री (सेवानिवृत्त), उत्तराखण्ड एक्स सर्विसमैन लीग के अध्यक्ष मेजर जनरल एम.एल. असवाल (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल शम्मी सभरवाल (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. सिंह (सेवानिवृत्त) सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय