प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि ने लैंड पोर्ट्स का महत्व स्थापित किया : अमित शाह
नई दिल्ली, 09 जून (हि.स.)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को भारत के लैंड पोर्ट्स के संचालन को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विकसित डिजिटल मंच लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (विनिमय) का उद्घाटन किया। यह प्रणाली सीमा शुल्क, आव्रजन, सीमा सुरक्षा बल और अन्य संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी।
इस अवसर पर शाह ने कहा कि लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी की संकल्पना 2014 से पहले एक रिपोर्ट की सिफारिशों से सामने आई थी। वर्ष 2012 से 2014 के बीच इसे आकार दिया गया और दो लैंड पोर्ट भी शुरू किए गए। लेकिन 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में इस अवधारणा को नई दिशा मिली। वास्तव में लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी का विचार मुख्य रूप से सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण आया था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के विजन ने इसे केवल सुरक्षा के पहले कवच तक सीमित नहीं रखा। इसके साथ-साथ इसे व्यापार को सुगम और सुरक्षित बनाने के एक प्रभावी माध्यम के रूप में भी विकसित किया गया।उन्होंने कहा कि इस सोच में एक नया आयाम भी जोड़ा गया कि लैंड पोर्ट दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क का पुल बन सकते हैं। साथ ही यह भी प्रयास किया गया कि लैंड पोर्ट भारत की संस्कृति और विरासत के राजदूत के रूप में भी कार्य करें।
गृह मंत्री ने कहा कि विस्तृत अध्ययन के बाद वह यह कह सकते हैं कि लैंड पोर्ट्स के तेज विकास से न केवल व्यापार बढ़ा है और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है बल्कि अवैध व्यापार को वैध व्यापार में बदलने के प्रयासों को भी बल मिला है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास में भी लैंड पोर्ट्स ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है और जिन इलाकों में पलायन बड़ी समस्या थी, वहां इस चुनौती से निपटने में भी मदद मिली है। शाह ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में सीमा प्रबंधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की अवधारणा और बहुआयामी रणनीति के साथ देश की स्थलीय सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस विजन में लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (विनिमय) तैयार करते समय सभी हितधारकों की जरूरतों और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा गया है। उनके अनुसार यह प्रणाली स्मार्ट बॉर्डर की अवधारणा के साथ मिलकर अधिक सुरक्षित और मजबूत सीमा प्रबंधन व्यवस्था के निर्माण में सहायक होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार