पारंपरिक मूल्यों का अभाव दूर करने के लिए महिलाओं के साथ पुरुषों का भी प्रबोधन जरूरी - मोहन भागवत

 




नई दिल्ली, 24 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि पारंपरिक जीवन मूल्यों को बचाने के लिए महिला और पुरुष दोनों का प्रबोधन आवश्यक है। युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए परिवार, कुटुंब के महत्व को ध्यान में रखते हुए संवाद जरुरी है।

इंडिया इंटरनेशनल आंबेडकर सेंटर में शुक्रवार को आयोजित ‘युगानुकूल मातृत्व’ पर विश्वमांगल्य सभा की दो दिवसीय प्रबोधन बैठक को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संबोधित किया।

इस मौके पर उन्होंने परिवार, समाज पर सोशल मीडिया के प्रभाव पर कहा कि तकनीक का उपयोग करना चाहिए लेकिन उसका गुलाम नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने से पहले उसका स्वयं पर पालन करना चाहिए।

समाज में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं सशक्त हैं, उन्हें अवसर देने की जरूरत है। आज के बदलते परिवेश में परिवार चलाने का दायित्व भी महिला और पुरुष दोनों पर समान है। अधिकारों के साथ कर्तव्यों का बोध हो और परिवार में अधिक संवाद हो तो अपनापन बढ़ता है। इसलिए परिवार को एकजुट रखने का दायित्व महिलाओं के साथ पुरुषों का भी है।

युगानुकूल मातृत्व विषय पर मोहन भागवत ने कहा, “मातृत्व की आवश्यकता मानव जीवन भर बनी रहती है। ऐसा नहीं है कि यह आवश्यकता केवल बचपन तक ही सीमित रहती है। दस-बारह वर्ष की आयु के बाद, जब बच्चा बड़ा हो जाता है, तो वह कम आज्ञाकारी होने लगता है। सबसे पहले वह अपनी माँ की अवज्ञा करता है। क्योंकि यदि वह अपने पिता की अवज्ञा करता है, तो उसे डांट पड़ सकती है, लेकिन माँ के साथ उसे यह भय नहीं होता, इसलिए वह पलटवार करता है, जिद्दी हो जाता है और इस तरह की हरकतें करता है। यहाँ तक कि जब प्रत्यक्ष शिक्षा जीवन को पूर्ण करने के लिए आवश्यक नहीं रह जाती, तब भी भावनात्मक सहारे की आवश्यकता बनी रहती है। एक स्वाभाविक और हमेशा उपलब्ध स्थान जहाँ कोई जाकर रो सकता है, जहाँ उसे शांति मिल सकती है, वह स्थान हमेशा माँ ही होती है। इसलिए, यह आवश्यकता मानव जीवन भर बनी रहती है।”

“युगानुकूल मातृत्व ” विषय पर डॉ. मोहन भागवत के सार्वजनिक उद्बोधन कार्यक्रम में जम्मू, श्रीनगर, अनंतनाग, लेह-लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर , पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से 800 से 1,000 महिलाएं शामिल हुई। महिलाओं ने बदलते सामाजिक परिदृश्य में मातृत्व, परिवार, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के विषयों पर अपने सवाल पूछे जिनका जवाब सरसंघचालक मोहन भागवत ने दिया। इस मौके पर डॉ वृषाली जोशी की पुस्तक युगानुकूल मातृत्व की अवधारणा पुस्तक का विमोचन किया गया।

इस मौके पर विश्वमांगल्य सभा के संस्थापक एवं गुरुजी दत्ता पीठ परंपरा के 18वें पीठाधीश्वर परम पूज्य आचार्य स्वामी जितेन्द्रनाथ जी महाराज उपस्थित रहे। अन्य विशिष्ट अतिथियों में भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, के साथ महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, सांसद कंगना रनौत, बांसुरी स्वराज, कमलजीत सहरावत, इंदिरा गांधी कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय सहित कई लोग मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी