दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता साफ, कैबिनेट ने विधेयक के मसौदे को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 07 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली सरकार ने राजधानी में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता साफ करते हुए संबंधित विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्तावित विधेयक को स्वीकृति दी गई। विधेयक को अब दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इसके लागू होने से दिल्ली उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनेगी और छात्रों को बेहतर शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों या विदेश जाने की आवश्यकता कम होगी।
प्रस्तावित कानून के तहत दिल्ली में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार किया जाएगा। राजधानी में भूमि की सीमित उपलब्धता को देखते हुए बड़े पारंपरिक कैंपस की अनिवार्यता नहीं होगी। इसके स्थान पर बहुमंजिला और आधुनिक शहरी परिसर विकसित करने की अनुमति दी जाएगी। विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन भूमि के आकार के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, आधारभूत संरचना, छात्र सुविधाओं और संस्थागत प्रशासन के आधार पर किया जाएगा।
विधेयक में दिल्ली के विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक पाठ्यक्रम में लागू आरक्षण नीति के अनुरूप 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। साथ ही सभी निजी विश्वविद्यालयों में पारदर्शी और भेदभावरहित प्रवेश प्रक्रिया सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
निजी विश्वविद्यालयों की निगरानी के लिए दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा। यह प्राधिकरण शिक्षण, शोध, प्रवेश, परीक्षा, छात्र अभिलेख और संस्थानों के समग्र प्रदर्शन की निगरानी करेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर सुधारात्मक निर्देश जारी कर सकेगा। किसी भी विश्वविद्यालय को मंजूरी देने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षाविदों, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रतिनिधियों और वित्त विशेषज्ञों की समिति प्रस्तावों की विस्तृत जांच करेगी।
सरकार के अनुसार सभी निजी विश्वविद्यालय स्व-वित्तपोषित होंगे और उन्हें नियमित सरकारी अनुदान नहीं मिलेगा। हालांकि, वे शोध परियोजनाओं के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे दिल्ली को वैश्विक शिक्षा और नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं, शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि प्रस्तावित कानून राजधानी के युवाओं को अपने ही शहर में विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी