कुड़मालि भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने और जनगणना को लेकर गृह मंत्रालय में महत्वपूर्ण बैठक
नई दिल्ली, 27 मई (हि.स.)। आगामी जनगणना 2026-27 में कुड़मि समुदाय और कुड़मालि भाषा के वर्गीकरण तथा संविधान की आठवीं अनुसूची में कुड़मालि भाषा को शामिल करने की मांग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन जनगणना विभाग के भाषा प्रभाग में बुधवार को बैठक आयोजित हुई। जिसमें ‘आदिवासी कुड़मि समाज-दिल्ली’ के प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के साथ दो घंटे से अधिक समय तक विस्तृत चर्चा की।
युवा आंदोलनकारी अमित महतो के नेतृत्व में हुए प्रतिनिधिमंडल में पंकज महतो, मुकेश महतो और दीपक महतो सहित झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम के प्रतिनिधि शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने आगामी जनगणना में कुड़मि जनजाति और उनकी मातृभाषा ‘कुड़मालि’ के वर्गीकरण को लेकर जानकारी मांगी।
बैठक में गृह मंत्रालय के भाषा जनगणना विभाग के रजिस्ट्रार जनरल बी.पी. महानंदा ने बताया कि आगामी जनगणना 2026-27 में भी कुड़मालि भाषा को पहले की तरह ‘कुरमालि थार’ नाम से मातृभाषा के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें सौंपे ज्ञापन में आग्रह किया कि ‘कुरमालि थार’ के साथ ब्रैकेट में ‘कुड़मालि’ भी जोड़ा जाए, ताकि समाज में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मुद्दा उठाया कि वर्ष 2011 और उससे पूर्व की जनगणनाओं में उचित कोड और स्पष्ट जानकारी के अभाव में कई लोगों ने भाषा और जाति के कॉलम में अलग-अलग नाम दर्ज किए, जिसके कारण कुड़मालि भाषियों का वास्तविक आंकड़ा सही रूप में सामने नहीं आ सका।
बैठक में संविधान की आठवीं अनुसूची में कुड़मालि भाषा को शामिल करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कुड़मालि भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, गृह मंत्रालय की ओर से इस संबंध में अभी तक किसी अंतिम तिथि या औपचारिक घोषणा की पुष्टि नहीं की गई है।
अमित महतो ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि केंद्र और संबंधित राज्य सरकारें कुड़मालि भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू नहीं करती हैं, तो झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में रांची, कोलकाता, भुवनेश्वर, दिल्ली और असम में क्षेत्रीय बैठकों का आयोजन कर समाज के लोगों को जनगणना में भाषा और जाति सही तरीके से दर्ज कराने को लेकर जागरूक किया जाएगा। साथ ही समाज के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे, ताकि इस बार कुड़मालि भाषियों का सही आंकड़ा दर्ज हो सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार