इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्ति’ की प्रतीक थीं रुक्मिणी अक्का : वी. शांताकुमारी
बेंगलुरु, 05 जून (हि.स.)। राष्ट्र सेविका समिति की पूर्व अखिल भारतीय सह-कार्यवाहिका स्वर्गीय रुक्मिणी अक्का को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा नगर स्थित राष्ट्रोत्थान परिषद के केशवशिल्पा सभागार में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका वी. शांताकुमारी ने कहा कि ललिता सहस्रनाम में वर्णित “इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्ति स्वरूपिणी” की संकल्पना का साक्षात उदाहरण रुक्मिणी अक्का थीं। उन्होंने सभी वर्गों के कार्यकर्ताओं को समान स्नेह दिया तथा संगठनात्मक कार्यों में अपनी सटीकता, आत्मविश्वास और कार्यकुशलता के कारण विशेष पहचान बनाई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य वी. नागराज ने कहा कि रुक्मिणी अक्का समाज सेवा के लिए खिला हुआ कमल थीं। उनका 97 वर्षों का जीवन पूर्णतः समाज को समर्पित रहा। उन्होंने कर्नाटक के साथ असम में भी संगठन के विस्तार और सेवा कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
केंद्रीय मंत्री एवं सांसद शोभा करंदलाजे ने कहा कि उनके सार्वजनिक जीवन के निर्माण और विकास में रुक्मिणी अक्का के मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि रुक्मिणी अक्का ने अनुशासन, सेवा भाव और समाज के प्रति समर्पण को अपने जीवन के माध्यम से सिखाया। वे सदैव उनके लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेंगी।
इस अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद्, समाजसेवी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने रुक्मिणी अक्का के समाजसेवा एवं संगठन निर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश एम.बी.