विश्व स्वास्थ्य दिवस पर 'साउथ एशिया हीट एंड हेल्थ हब' की शुरुआत

 


नई दिल्ली, 07 अप्रैल (हि.स.)। जलवायु परिवर्तन के खतरों के मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य दिवस पर अग्रणी अनुसंधान, नीति और विकास संगठनों के समूह ने 'ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क' (जीएसएचआईएन) के ‘दक्षिण एशिया हब’ की शुरुआत की है। 'वेलकम' से वित्तपोषित इस नए क्षेत्रीय हब की मेजबानी नई दिल्ली स्थित 'काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर' (सीईईडब्ल्यू) कर रहा है।

इसके पांच समन्वयकारी भागीदार हैं जिसमें सीईईडब्ल्यू, सस्टेनेबल फ्यूचर्स कोलैबोरेटिव, नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल, ब्रैक जेम्स पी. ग्रांट स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, और यूनाइटेड नेशंस इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड पैसिफिक शामिल है। यह संगठन एक साथ मिलकर साझा समझ को बेहतर बनाने और नीतिगत बदलावों के लिए पर्याप्त सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार, शिक्षा जगत, निजी उद्यमों और नागरिक समाज के हितधारकों को जोड़ेंगे।

यह हब भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के 'साउथ एशिया क्लाइमेट एंड हेल्थ डेस्क' और भारत मौसम विज्ञान विभाग के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गर्मी की प्रारंभिक चेतावनी और हीट साइंस को समुदायों के लिए प्रभावशाली समाधान बनाने में इस्तेमाल किया जा सके। 'साउथ एशिया हीट एंड हेल्थ हब' की अध्यक्षता सीईईडब्ल्यू के फेलो डॉ. विश्वास चितले करेंगे, जिन्होंने भारत में जिला-स्तरीय गर्मी के जोखिम का आकलन और हीट एक्शन प्लानिंग पर प्रमुखता से काम किया है।

इस अवसर पर

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू), सीईओ डॉ. अरुणाभा घोष ने कहा कि भीषण गर्मी महज एक मौसमी खतरा भर नहीं है। यह संपूर्ण दक्षिण एशिया में सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक उत्पादकता और बुनियादी ढांचे के लिए व्यवस्थागत जोखिम है। यह गर्मी जलवायु, स्वास्थ्य, श्रम और शहरी विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करती है, जो इसे खास तौर पर खतरनाक बना देता है। इसके बावजूद, गर्मी का सामना करने के उपाय अक्सर विखंडित रहते हैं। सीईईडब्ल्यू गर्मी के जोखिम को बारीकी से समझने के लिए जरूरी आंकड़ों, विश्लेषण और नीतिगत साझेदारियों को तैयार कर रहे हैं।

ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क के कोऑर्डिनेटर अलेजांद्रो साएज रियल ने कहा कि साउथ एशिया हब का शुभारंभ ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क के वैश्विक विस्तार में मील का पत्थर है। गर्मी से सर्वाधिक प्रभावित शहर और समुदाय इसी क्षेत्र में पड़ते हैं, और लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए सर्वोत्तम उपलब्ध विज्ञान, उपकरणों और आपसी ज्ञान तक पहुंच होना बहुत जरूरी है। यह हब आदान-प्रदान का एक ऐसा ढांचा बनाता है, जो दक्षिण एशिया के हितधारकों और संस्थानों को विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बढ़ते वैश्विक समुदाय से जोड़ने का काम करेगा। इनमें से कई लोग इस माह के अंत में नई दिल्ली में आयोजित होने वाली आगामी 'ग्लोबल हीट एंड कूलिंग फोरम' में एक मंच पर आएंगे, जो गर्मी की समस्या को एक महत्वपूर्ण और कार्रवाई योग्य प्राथमिकता बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।”

डब्ल्यूएचओ रीजनल ऑफिस फॉर साउथ एशिया की डॉ. कैथरीना कोरा बोहमे ने कहा कि भीषण गर्मी हमारे समय के सबसे प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों में से एक है, फिर भी यह अक्सर नीतियों और योजनाओं में अदृश्य बनी रहती है। विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्रवाई के संबंध को मजबूत करना जरूरी है। यह हब विश्व स्वास्थ्य दिवस की जीवन की रक्षा के लिए विज्ञान के साथ खड़े होने की भावना को दर्शाता है।

उल्लेखनीय है कि सीईईडब्ल्यू के एक शोध के अनुसार, अकेले भारत में 57 प्रतिशत जिले - जहां लगभग तीन-चौथाई आबादी रहती है - पहले से उच्च से बहुत उच्च गर्मी के जोखिम का सामना कर रहे हैं। रात्रिकालीन तापमान और आर्द्रता में वृद्धि गर्मी से जुड़ी समस्याओं (हीट स्ट्रेस) को और अधिक बढ़ा रहा है। इससे शरीर की गर्मी से छुटकारा पाने की क्षमता घट रही है और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी अतिरिक्त दबाव आ रहा है। बांग्लादेश में पिछले चार दशकों में 'महसूस किए जाने वाले तापमान' में 4.5 डिग्री की वृद्धि देखी गई है। यहां तक कि नेपाल और भूटान जैसे अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी देशों में भी अब लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है।

अप्रैल 2026 से परिचालन शुरू करते हुए, ‘साउथ एशिया ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क हब’ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि परिवारों, श्रमिकों, स्कूलों, अस्पतालों और नगरीय संस्थाओं के अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी, सुरक्षित कामकाजी घंटे, समयानुकूल कूलिंग उपायों और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मजबूत नीतिगत सलाह देते हुए प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी