विचारों की शक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक ताकतः होसबाले
नई दिल्ली, 15 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने गुरुवार को कहा कि ‘मंत्र–विप्लव’ जैसी विचारोत्तेजक पुस्तकों की रचना समाज और राष्ट्र के लिए शुभ संकेत है। ऐसी पुस्तकें हमें यह स्मरण कराती हैं कि विचारों की शक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक ताकत है और यदि विचार शुद्ध और सशक्त हों तो समाज एवं राष्ट्र दोनों सुरक्षित रहते हैं।
होसबाले ने भारत मंडपम में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में ‘मंत्र–विप्लव’ पुस्तक का लोकार्पण किया। वरिष्ठ पत्रकार एवं पांचजन्य के पूर्व संपादक तरुण विजय द्वारा लिखी गई इस पुस्तक को प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। लोकार्पण समारोह में पुस्तक के लेखक तरुण विजय, भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता एवं सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी तथा प्रभात प्रकाशन के चेयरमैन प्रभात कुमार समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
सरकार्यवाह होसबाले ने कहा कि विचारों का भ्रष्ट होना राष्ट्र के लिए घातक होता है। उन्होंने महात्मा विदुर के कथन का उल्लेख करते हुए कहा, “विष की एक बूंद जिसे दी जाए, उससे केवल वही एक व्यक्ति मरता है। विषैला तीर जिस व्यक्ति पर आघात करे, उससे भी केवल वही एक व्यक्ति मारा जाता है, पर अगर विचार ही भ्रष्ट हो जाए और उसकी समझ में राजा और प्रजा में संभ्रम निर्माण हो तो हे धृतराष्ट्र, उस समय मंत्र-विप्लव की स्थिति पैदा होती है, जिसमें राजा, प्रजा और राष्ट्र-तीनों का नाश हो जाता है।”
उन्होंने कहा कि समाज की बुद्धि और विचारधारा पर आक्रमण पूरे राष्ट्र को प्रभावित करता है। हमारे देश में अतीत में केवल भूमि या उद्योगों पर ही नहीं, बल्कि हमारी बुद्धि और विचारों पर भी आक्रमण हुए। असत्य को सत्य के रूप में प्रस्तुत किया गया और आर्यों के बारे में गलत धारणाएं फैलाई गईं।
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे बड़ी और प्राचीन है, जिसने न केवल अपने नागरिकों को बल्कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को भी प्रेरणा दी है। भारत की संस्कृति ने विज्ञान, गणित, दर्शन और अध्यात्म के क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह आज भी विश्व को दिशा देता है।
डॉ. त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद सोमनाथ में स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है, जो भारतीय संस्कृति की गौरवपूर्ण परंपरा का प्रतीक है।------------
हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी