जेडएसआई के शोधकर्ताओं की बड़ी उपलब्धि, तमिलनाडु तट पर समुद्री जीवों की दो नई प्रजातियों की खोज
कोलकाता, 06 अप्रैल (हि.स.)। भारत की समुद्री जैव विविधता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के शोधकर्ताओं ने तमिलनाडु तट के पास समुद्री नेमाटोड (सूक्ष्म कृमि) की दो नई प्रजातियों की खोज की है। यह शोध 25 मार्च, 2026 को अंतरराष्ट्रीय वर्गिकी शोध पत्रिका जूटाक्सा में प्रकाशित हुआ है।
यह अध्ययन जेडएसआई की शोधकर्ता ऋतिका दत्ता और अंजुम रिजवी द्वारा किया गया है। उन्होंने कोरोनोनेमा धृति और एपाकैंथियन इंडिका नामक दो नई प्रजातियों का वैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत किया है। ये सूक्ष्म जीव आकार में बेहद छोटे होते हुए भी समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जेडएसआई की ओर से सोमवार शाम जारी बयान में बताया गया है कि कोरोनोनेमा धृति वैश्विक स्तर पर इस वंश की केवल चौथी ज्ञात प्रजाति है। इससे पहले इस वंश की प्रजातियां केवल ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड और वियतनाम में दर्ज की गई थीं। भारतीय समुद्री क्षेत्र में इसकी उपस्थिति समुद्री जीव भूगोल के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस प्रजाति का नाम जेडएसआई की निदेशक डॉ. धृति बनर्जी के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने भारत की जीव विविधता के दस्तावेजीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
दूसरी प्रजाति एपाकैंथियन इंडिका का नाम भारत के नाम पर रखा गया है। इसकी शारीरिक संरचना विशेष रूप से जटिल है। सामान्यतः कई नेमाटोड सूक्ष्म जीवों पर निर्भर होते हैं, लेकिन यह प्रजाति विशेष जबड़ों और दांत जैसी संरचना के कारण समुद्री तल की खाद्य श्रृंखला में एक सूक्ष्म शिकारी की भूमिका निभाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार ये सूक्ष्म जीव समुद्री पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ये जैविक अपशिष्ट को तोड़कर पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं, समुद्री तलछट की गुणवत्ता बनाए रखते हैं तथा पर्यावरणीय बदलाव और जलवायु परिवर्तन के संकेतक के रूप में भी काम करते हैं।
जेडएसआई की निदेशक डॉ. धृति बनर्जी ने इस उपलब्धि पर कहा कि समुद्र के भीतर की जैव विविधता का बड़ा हिस्सा अभी भी अनजान है। इन सूक्ष्म जीवों को समझना समुद्री संरक्षण की प्रभावी नीतियां बनाने और तटीय पारिस्थितिकी की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, इस तरह की खोजें भारत की समुद्री जैव विविधता के दस्तावेजीकरण को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती हैं। --------------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर