पर्यटन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए 2,500 करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी में बंगाल सरकार
कोलकाता, 01 अक्टूबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार की नई भूमि और औद्योगिक नीति, जिसे दुर्गा पूजा से पहले पेश किया जाना है, पर्यटन क्षेत्र पर विशेष रूप से केंद्रित होगी। राज्य के पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने गुरुवार को कोलकाता में आयोजित आईसीसी हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म समिट में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार पर्यटन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगभग 2,500 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य लेकर चल रही है।
मंत्री शंकर घोष ने कहा कि राज्य सरकार को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के प्रत्यक्ष निवेश की उम्मीद है। इसके लिए वर्ष 2026-27 के लिए 500 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया गया है, ताकि बंगाल के पर्यटन स्थलों को विश्व स्तर पर सुलभ बनाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक, टिकाऊ और तकनीक-सक्षम पर्यटन के माध्यम से पश्चिम बंगाल को विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले प्रमुख राज्य में बदलना है।
पर्यटन क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने और स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए सरकार एक नया हॉस्पिटैलिटी संस्थान स्थापित करने की योजना बना रही है। मंत्री ने बताया कि पर्यटन विभाग ने नई पर्यटन नीति का मसौदा भी तैयार कर लिया है, जो आगामी भूमि और औद्योगिक नीति का हिस्सा होगी। विभाग पर्यटन क्षेत्र की रीब्रांडिंग और पुनर्रचना कर रहा है ताकि भविष्य में विदेशी निवेश को भी आकर्षित किया जा सके। इसके अलावा मिरिक और कलिम्पोंग जैसे प्रमुख गंतव्यों को विकसित करने के साथ-साथ कई नई परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश का प्रवाह पहले ही शुरू हो चुका है। हाल ही में पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित एक शिखर सम्मेलन में 12,634 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो इस क्षेत्र की व्यापक क्षमता को दर्शाता है।
इस कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्य की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार बंगाल को सांस्कृतिक विरासत पर्यटन का गंतव्य बनाने की योजना बना रही है। शेखावत ने कहा कि भविष्य में पर्यटन केवल स्मारकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पर्यटकों के अनुभव से संचालित होगा। कोलकाता के पास अपने एमआईसीई (मीटिंग्स, इन्सेंटिव, कॉन्फ्रेंस और एग्जिबिशन) बुनियादी ढांचे, होटलों, शानदार कनेक्टिविटी, समृद्ध संस्कृति और विरासत के दम पर एक प्रमुख पर्यटन और इवेंट डेस्टिनेशन के रूप में उभरने के सभी जरूरी तत्व मौजूद हैं। उन्होंने जोर दिया कि इस विजन को साकार करने और वैश्विक स्तर पर इसकी मार्केटिंग के लिए सरकार और उद्योग जगत को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।-----------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर