ताजपुर डीप-सी पोर्ट परियोजना पर विराम, दादनपात्रबाड़ में नए बंदरगाह की तैयारी शुरू
कोलकाता, 04 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार ने ताजपुर में प्रस्तावित गहरे समुद्री बंदरगाह (डीप-सी पोर्ट) परियोजना को आगे न बढ़ाने का संकेत देते हुए अब वैकल्पिक स्थान पर नई योजना तैयार करने की घोषणा की है। गुरुवार को नवान्न में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्य सरकार ने ताजपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर दादनपात्रबाड़ क्षेत्र में नई बंदरगाह परियोजना विकसित करने का निर्णय लिया।
बैठक के बाद सरकार ने बताया कि ताजपुर में परियोजना के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण वहां डीप-सी पोर्ट का निर्माण व्यावहारिक नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में पहले अडानी समूह से बातचीत हुई थी, लेकिन भूमि की कमी के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब दादनपात्रबाड़ में लगभग 1,700 एकड़ सरकारी भूमि उपलब्ध होने के चलते इसे वैकल्पिक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।
राज्य सरकार ने कहा कि इस प्रस्ताव को केंद्रीय बंदरगाह एवं जहाजरानी मंत्रालय समेत संबंधित एजेंसियों के साथ साझा किया गया है। बैठक में 44 जेटी (बर्थ) के निर्माण की योजना पर भी चर्चा हुई, जिनमें से 41 को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। सरकार ने संकेत दिया कि इन परियोजनाओं पर जल्द कार्य शुरू किया जाएगा।
बैठक में गंगासागर क्षेत्र के विकास और कपिल मुनि आश्रम से जुड़ी परियोजनाओं पर भी सहमति बनी। सरकार का दावा है कि गंगासागर मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार का सहयोग प्राप्त होगा। इसके अलावा बालीगंज क्षेत्र में बंदरगाह संपर्क और तटीय सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास पर भी काम शुरू करने की योजना बनाई गई है।
कोलकाता के प्रमुख घाटों के सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। सरकार के अनुसार बागबाजार, शोभाबाजार, आहिरिटोला, मल्लिकघाट, बाबुघाट, रामकृष्णपुर घाट और बंधाघाट सहित कई घाटों के नवीनीकरण का कार्य चल रहा है। इनमें से दो घाटों का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष परियोजनाओं को दुर्गा पूजा से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
शहर में भूमि अतिक्रमण और जर्जर भवनों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने बताया कि इस जिम्मेदारी को नगरपालिकाओं को सौंपा गया है और बंदरगाह प्राधिकरण के सहयोग से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आवास निर्माण की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
इसके अलावा, कोलकाता बंदरगाह क्षेत्र में अवैध गतिविधियों और कथित सिंडिकेट व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए पुलिस, बंदरगाह प्राधिकरण, नगर निकाय, सीमा सुरक्षा बल, सीमा शुल्क विभाग तथा खुफिया एजेंसियों के संयुक्त समन्वय से कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। राज्य सरकार ने यह भी संकेत दिया कि बंदरगाह और समुद्री परियोजनाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए अलग शिपिंग विभाग के गठन पर विचार किया जा रहा है। --------------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर