बंगाल उपचुनाव : नंदीग्राम में 79.39 और रेजीनगर में 78.42 फ़ीसदी मतदान, विधायक हुमायूं कबीर गिरफ्तार

 


कोलकाता, 06 अक्टूबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के दो बेहद चर्चित और संवेदनशील विधानसभा क्षेत्र पूर्व मेदिनीपुर के नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद के रेजीनगर, में मंगलवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उपचुनाव संपन्न हुआ। चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, मतदान प्रतिशत काफी ऊंचा रहा। नंदीग्राम में 79.39 प्रतिशत और रेजीनगर में 78.42 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

कड़ी सुरक्षा के बावजूद दोनों क्षेत्रों से राजनीतिक तनाव, पुलिस के साथ झड़प और विपक्षी दलों द्वारा मतदान में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। सबसे बड़ी घटना मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में घटी, जहां पुलिस से तीखी बहस के बाद आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख और नाओदा से विधायक हुमायूं कबीर को गिरफ्तार कर लिया गया।

रेजीनगर में मतदान के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब विधायक हुमायूं कबीर की अपनी पार्टी के कार्यालय में पुलिस अधिकारियों के साथ तीखी बहस हुई। कबीर ने पुलिस पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इशारे पर काम करने और मतदाताओं को डराने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने कथित तौर पर लोगों से पुलिस की ज्यादतियों का डंडों से विरोध करने का भी आह्वान किया था।

वायरल हुए घटना के दृश्यों में पुलिसकर्मियों को कबीर को शर्ट से पकड़कर गाड़ी में बिठाते हुए देखा गया। मुर्शिदाबाद के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सचिन मक्कड़ ने स्पष्ट किया कि कबीर न तो उम्मीदवार थे और न ही अधिकृत चुनाव एजेंट, इसलिए उनका मतदान केंद्रों के आसपास घूमना नियमों का उल्लंघन था। कबीर पर मतदाताओं को प्रभावित करने और भड़काने का आरोप है।

इस घटना के बाद कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद अब्दुल्लाहित काफी ने रेजीनगर थाने के बाहर धरना दिया और पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए चुनाव रद्द कर दोबारा मतदान कराने की मांग की। वाम दलों (सीपीआई-एम) ने भी मोरादीघी क्षेत्र के दादपुर में बूथ संख्या 112, 113, 114 और 122 पर अपने एजेंटों को रोके जाने और मतदाताओं की उंगलियों पर स्याही लगाकर उन्हें वापस भेजने का आरोप लगाया।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पूर्व सीट नंदीग्राम में भी तनाव का माहौल रहा। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने आरोप लगाया कि पुलिस की शह पर उनके पोलिंग एजेंटों को बूथों में प्रवेश करने से रोका गया। प्रधान ने दावा किया कि चक्रबेड़िया इलाके में पुलिस ने मतदाताओं पर लाठीचार्ज किया। नंदीग्राम में कई स्थानों पर कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच नोकझोंक भी हुई।

इसके अलावा, सरबेड़िया में सीपीआई (सीपीआई) के एक पोलिंग एजेंट पर कथित हमले की घटना सामने आई, जिसे बाद में अस्पताल में भर्ती कराया गया। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की है कि खेजुरी की तरफ से मोटरसाइकिल सवार बाहरी लोग नंदीग्राम में घुसकर मतदाताओं को धमका रहे हैं। मतदान में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने नंदीग्राम-1 ब्लॉक के कांग्रेस अध्यक्ष को भी हिरासत में लिया है।

गाैरतलब है कि, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी तथा विधायक हुमायूं कबीर के इस्तीफे के कारण यह दाेनाें सीटें खाली हुई थीं। शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनाव में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों जगह से जीत दर्ज की थी। नियमों के मुताबिक, उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी। वहीं, हुमायूं ने रेजीनगर और नाओदा दोनों जगह से चुनाव जीता और बाद में नाओदा सीट अपने पास रखते हुए रेजीनगर छोड़ दी थी।

नंदीग्राम में भाजपा ने मुख्यमंत्री के दिवंगत सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ को मैदान में उतारा है, जिससे यह मुकाबला भावनात्मक हो गया है। तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नाम वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन दिया है। वहीं, रेजीनगर में मुकाबला बहुकोणीय है। यहां हुमायूं कबीर के बेटे गोलाम नबी आजाद, भाजपा के सखारव सरकार, टीएमसी के रबीउल आलम चौधरी और कांग्रेस के मोहम्मद अब्दुल्ला सहित अन्य उम्मीदवार मैदान में हैं।

उपचुनाव के नतीजों की घोषणा 9 अक्टूबर को की जाएगी। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए दोनों विधानसभा क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की 71 कंपनियों को तैनात किया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर