जन आंदोलन बने नशा मुक्त भारत : उपराष्ट्रपति

 


बेंगलुरु, 28 जून (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को बेंगलूरु में एक कार्यक्रम में कहा कि नशे की समस्या केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि शिक्षा, उत्पादकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय विकास के लिए भी गंभीर चुनौती है। उन्होंने आह्वान किया कि शैक्षणिक संस्थान, परिवार, स्वास्थ्यकर्मी, कानून प्रवर्तन एजेंसियां और नागरिक समाज मिलकर नशा मुक्त भारत के निर्माण के लिए कार्य करें तथा ‘नो टू ड्रग्स’ को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का स्वरूप दें।

उपराष्ट्रपति बेंगलुरु के श्री कांतीरवा स्टेडियम में राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरजीयूएचएस) के 31वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित ‘नशा मुक्त भारत कॉन्क्लेव’ में शामिल हुए। इस कार्यक्रम का आयोजन आरजीयूएचएस ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और दिशा बोध फाउंडेशन के सहयोग से किया था।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई व्यक्ति स्तर से शुरू होकर समाजव्यापी अभियान में बदलनी चाहिए। नशा मुक्त भारत का अर्थ केवल मादक पदार्थों की अनुपस्थिति नहीं है बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, सही निर्णय लेने की क्षमता, सहयोगी परिवारों और मजबूत समुदायों का निर्माण भी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने मन पर पूर्ण नियंत्रण रखना चाहिए क्योंकि जब नशा मन पर नियंत्रण कर लेता है तो व्यक्ति अपने जीवन पर नियंत्रण खो देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि नशे की लत के कारण बर्बाद होने वाला प्रत्येक युवा जीवन देश की क्षमता और भविष्य की क्षति है। उन्होंने छात्रों, विशेष रूप से भावी चिकित्सकों, नर्सों, फार्मासिस्टों, मनोवैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों से जागरूकता के दूत बनने का आह्वान किया। युवाओं को नशा उन्मूलन के लिए रोकथाम, उपचार, अनुसंधान और साक्ष्य आधारित नीतियों के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने नशा चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहार विज्ञान और सामुदायिक हस्तक्षेपों पर अधिक शोध की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि नीतियों का आधार वैज्ञानिक प्रमाण होने चाहिए और अनुसंधान के निष्कर्षों को नीति निर्माण में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने मादक पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी, परामर्श सेवाओं और सहकर्मी सहायता नेटवर्क के प्रभावी उपयोग की भी वकालत की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह लंबे समय से नशा मुक्त शैक्षणिक परिसरों की आवश्यकता पर बल देते रहे हैं। तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में उन्होंने लगातार ड्रग-फ्री कैंपस की वकालत की है। उन्होंने इस वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय में शुरू किए गए ‘ड्रग-फ्री कैंपस अभियान’ और ई-प्रतिज्ञा मंच का उल्लेख करते हुए संतोष व्यक्त किया कि इस पहल ने परिसर में नशामुक्त वातावरण बनाने में सकारात्मक योगदान दिया है।

राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय को स्वास्थ्य शिक्षा, अनुसंधान और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उसके महत्वपूर्ण योगदान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने देश की सेवा के लिए समर्पित स्वास्थ्य पेशेवरों की कई पीढ़ियां तैयार की हैं।

उन्होंने इस बात पर ख़ुशी व्यक्त की कि बड़ी संख्या में छात्रों ने बेंगलुरु, कर्नाटक और अंततः पूरे भारत को नशा मुक्त बनाने की शपथ ली। उन्होंने कहा कि युवाओं की यह प्रतिबद्धता नशा मुक्त भारत अभियान को नई शक्ति प्रदान करेगी।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत शिशुओं को पोलियो की खुराक भी पिलाई। उन्होंने विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपतियों को संस्थान के विकास और उन्नति में उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया।

कार्यक्रम में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सैयद अब्दुल नजीर, कर्नाटक के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. शरण प्रकाश आर. पाटिल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर फरीद, आरजीयूएचएस के कुलपति डॉ. भगवान तथा अन्य लोग भी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर