एकात्म मानव दर्शन आज भी प्रासंगिक : उपराष्ट्रपति

 


नई दिल्ली, 25 मार्च (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानव दर्शन’ आज भी अत्यंत प्रासंगिक है और वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बीच संतुलित और समन्वित जीवन का मार्ग दिखाता है।

उपराष्ट्रपति ने बुधवार को कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय, मैसूरु में ‘एकात्म मानव दर्शन – भारत का विश्वदृष्टिकोण’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सम्मेलन का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह सम्मेलन 25 से 27 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने इस सम्मेलन के आयोजन के लिए कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, प्रज्ञा प्रवाह और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि एकात्म मानव दर्शन व्यक्ति, समाज, प्रकृति और ब्रह्मांड के बीच गहरे संबंध पर आधारित है। आज के समय में जब दुनिया विभाजन, तनाव और अविश्वास जैसी समस्याओं से जूझ रही है, यह दर्शन धर्म, कर्तव्य और मूल्यों के माध्यम से समरसता का मार्ग प्रस्तुत करता है। वास्तविक विकास वही है जो शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समग्र विकास के साथ-साथ प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखे।

उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कर्तव्य और सेवा के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मंत्र का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य समावेशी और सतत विकास पर आधारित है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से जुड़ा है।

तेजी से बढ़ती तकनीकी प्रगति के संदर्भ में उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए और इसे नैतिक मूल्यों द्वारा संचालित किया जाना आवश्यक है। उपराष्ट्रपति ने एकात्म मानव दर्शन के सिद्धांतों को नीति और व्यवहार में अपनाने का आह्वान किया, ताकि एक संतुलित और सामंजस्यपूर्ण विश्व का निर्माण किया जा सके। उन्होंने सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार