सिविल सेवक विकसित भारत के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएं: उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली, 21 अप्रैल (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को सिविल सेवकों से कहा कि अधिक शक्ति के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है और उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभानी चाहिए। उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।
उपराष्ट्रपति यहां विज्ञान भवन में आयोजित 18वें सिविल सेवा दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए योजनाओं की प्रभावी ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ और जमीनी हकीकत के प्रति संवेदनशीलता बेहद जरूरी है, ताकि शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि योजनाएं भले ही दिल्ली में बनती हों लेकिन उनका वास्तविक प्रभाव तभी दिखता है जब उन्हें दूरदराज के गांवों तक सही तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने सिविल सेवकों को “भारत की रीढ़” बताते हुए कहा कि उनकी भूमिका देश के विकास और समावेशी प्रगति में केंद्रीय है।
उन्होंने देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सिविल सेवाओं को “स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया” बताया था। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज भी सिविल सेवक उसी भावना के साथ देश की एकता और प्रशासनिक मजबूती को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में कार्यरत सिविल सेवक राष्ट्रीय एकता और समन्वय के सबसे बड़े दूत हैं।
उन्होंने ‘आकांक्षी जिला कार्यक्रम’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी सफलता जिला स्तर पर अधिकारियों की समझ और कार्यान्वयन क्षमता पर निर्भर करती है। उन्होंने जोर दिया कि हर जिले की जरूरतें अलग होती हैं और उसी के अनुसार योजनाओं को लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी राज्य या जिला विकास की दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले दशक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। देश जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उपराष्ट्रपति ने बताया कि करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं, 4 करोड़ से अधिक गरीबों के लिए घर बनाए गए हैं और सीमावर्ती गांवों को विकसित कर ‘वाइब्रेंट विलेज’ बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि गरीबों के कल्याण के लिए लक्षित योजनाओं का सही क्रियान्वयन जरूरी है और लाभ उन्हीं तक पहुंचे जो वास्तव में जरूरतमंद हैं। उन्होंने सिविल सेवकों से अपील की कि वे टीम भावना के साथ काम करें और व्यक्तिगत उत्कृष्टता के साथ सामूहिक प्रदर्शन को भी महत्व दें।
सिविल सेवकों को सरकारी नीतियों का वास्तविक क्रियान्वयनकर्ता बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण ही इन उपलब्धियों के पीछे मुख्य कारण है। तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रशासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बना रहे हैं। उन्होंने सिविल सेवकों को नई तकनीकों को अपनाने और लगातार अपने कौशल को उन्नत करने की सलाह दी।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि अब केवल सामान्य ज्ञान रखने वाले अधिकारियों का दौर समाप्त हो रहा है और प्रशासन में विशेषज्ञता की आवश्यकता बढ़ रही है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे भर्ती नीतियों में सुधार करें ताकि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ सिविल सेवाओं में शामिल हो सकें।
नैतिकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व पद या शक्ति से नहीं बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी सही और नैतिक निर्णय लेने की क्षमता से परिभाषित होता है। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे दबाव में आने के बजाय सही मार्गदर्शन का पालन करें और ईमानदारी बनाए रखें।
सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि 2016 में जहां महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत थी, वहीं 2025 की परीक्षा में यह बढ़कर करीब 31 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने इसे ‘नारी शक्ति’ और बदलती सामाजिक सोच का प्रतीक बताया।
उन्होंने हाल ही में राष्ट्र को समर्पित ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ये केवल इमारतें नहीं बल्कि सेवा, कर्तव्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण के प्रतीक हैं। उन्होंने सिविल सेवकों से आह्वान किया कि वे अपने कार्यों से समाज के अंतिम व्यक्ति तक बदलाव लाएं और शासन को अधिक समावेशी बनाएं।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले वर्षों में शासन व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है और अब प्रशासन नागरिक-केंद्रित हो गया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे शिकायत निवारण प्रणाली अधिक प्रभावी बनी है।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी. के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन और प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार