भवाइया लोक संगीत पर पुस्तक का विमोचन, उपराष्ट्रपति ने सांस्कृतिक विरासत बचाने पर दिया जोर

 


नई दिल्ली, 25 जून (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार को उपराष्ट्रपति भवन में भवाइया लोक संगीत पर आधारित पुस्तक “संस्कृतिर रत्न भंडार: भवाइयार इतिबृत्त” का विमोचन किया। इस पुस्तक को सांसद जयंत कुमार रॉय और संगीता रॉय ने लिखी है। इस मौके पर राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला, कूच बिहार पंचानन बर्मा यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) निखिल चंद्र रे, और प्रकाशक, कथा-ओ-कहानी के देबराज पात्रा शामिल थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भवाइया लोक संगीत उत्तर बंगाल और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की भावनाओं, संघर्षों, आशाओं और जीवन अनुभवों का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाएं, लोककलाएं, रीति-रिवाज और परंपराएं देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करना सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि आधुनिकीकरण और वैश्वीकरण के बावजूद भवाइया जैसी लोक परंपराएं आज भी जीवित हैं क्योंकि वे आम लोगों के जीवन और भावनाओं से जुड़ी हुई हैं। युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीकों का उपयोग कर भारतीय संस्कृति, भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते समय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास तभी सार्थक होता है जब उसके साथ सांस्कृतिक आत्मविश्वास और सभ्यतागत जागरूकता भी जुड़ी हो।

उन्होंने यह भी कहा कि योग जैसी भारत की प्राचीन परंपराएं आज दुनिया की कई चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर रही हैं। सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि “भारत में अनेक भाषाएं, संस्कृतियां और समुदाय हैं, लेकिन हमारी सभ्यतागत भावना एक है। भारत एक है और हमेशा एक रहेगा।”

उल्लेखनीय है कि

भवाइया उत्तर बंगाल, असम और आसपास के क्षेत्रों का एक प्रसिद्ध लोक संगीत है, जो ग्रामीण जीवन, खेती-किसानी, प्रेम, विरह और लोक संस्कृति को गीतों के माध्यम से अभिव्यक्त करता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी