युवाओं को जाग्रत व संस्कारित करने का कार्य कर रहा है विहिप : चंपत राय

 


श्रीराम मंदिर निर्माण सामूहिक संकल्प और करोड़ों लोगों की आस्था का परिणाम : चम्पत राय

झांसी,26 मई (हि.स.)। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव व विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि विहिप समाज में युवाओं को जाग्रत करने और उन्हें संस्कारित करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है,बल्कि समाज को संगठित और जागरूक बनाना भी है।

वह उक्त बातें उत्तर प्रदेश के झांसी में कानपुर प्रांत के विश्व हिंदू परिषद की दुर्गा वाहिनी के आठ दिवसीय शौर्य प्रशिक्षण वर्ग के दूसरे दिन यानी मंगलवार को अपने सम्बोधन में कही।

श्री राय ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि मंदिर परिसर में करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी चारदीवारी तैयार की जा रही है। इसके साथ ही ऑडिटोरियम, विश्राम गृह, ट्रस्ट कार्यालय, हुतात्माओं की स्मृति में स्मारक और रामकथा संग्रहालय का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2027 तक सभी प्रमुख कार्य पूरे हो जाएंगे।

एक सवाल के जबाब में उन्होंने कहा कि इच्छाओं को अधिक नहीं पालना चाहिए, क्योंकि जब इच्छाएं पूरी नहीं होतीं तो व्यक्ति में गुस्सा पैदा होता है और सामाजिक जीवन प्रभावित होने लगता है। उन्होंने युवाओं को संयम,धैर्य और सामूहिक सोच के साथ आगे बढ़ने की सीख दी।

चंपत राय ने कहा कि कभी किसी ने नहीं सोचा था कि श्रीराम लला का भव्य मंदिर निर्माण कार्य पूर्ण हो सकेगा,लेकिन यह सामूहिक संकल्प और करोड़ों लोगों की आस्था का परिणाम है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सोच से बड़े कार्य संभव नहीं होते,बल्कि समाज की एकजुट भावना ही इतिहास रचती है। इस दौरान उनके साथ विहिप के प्रांत उपाध्यक्ष विनोद अग्रवाल, निलय बोस व मयंक गुप्ता आदि उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि झांसी महानगर में विश्व हिंदू परिषद कानपुर प्रांत की दुर्गा वाहिनी का प्रांतीय 8 दिवसीय शौर्य प्रशिक्षण वर्ग 24 मई से 1 जून तक भानी देवी गोयल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में चल रहा है। इसके लिए शुक्रवार को भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ था। शौर्य प्रशिक्षण वर्ग में कानपुर प्रांत के 21 जनपदों से 250 बालिकाएं भाग ले रहीं हैं, जिनमें 17 बालिकाएं नेपाल से भी शामिल हैं।

वर्ग का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को आत्मरक्षा, अनुशासन और शारीरिक दक्षता के लिए तैयार करना है। आठ दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण वर्ग में प्रतिभागियों को दंड संचालन,यष्टि प्रशिक्षण,बाधाओं को पार करना, रस्सी पर चलना तथा अन्य साहसिक गतिविधियों का अभ्यास कराया जा रहा है। प्रतिदिन 25 प्रशिक्षक विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षण देकर बालिकाओं को शारीरिक, मानसिक और व्यवहारिक रूप से मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, ताकि वे राष्ट्रहित से ओतप्रोत हो हर प्रकार की चुनौती का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया