उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने की यूके हाउस ऑफ लॉर्ड्स के लॉर्ड स्पीकर से भेंट

 


नई दिल्ली, 16 जनवरी (हि.स.)। उप राष्ट्रपति एवं राज्य सभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को यूनाइटेड किंगडम (यूके) की संसद के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के लॉर्ड स्पीकर, लॉर्ड मैकफॉल ऑफ एल्क्लुइथ पीसी के साथ संसद भवन में सौहार्दपूर्ण एवं सार्थक भेंट की। यह भेंट 14 से 16 जनवरी तक भारत द्वारा आयोजित राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन(सीएसपीओसी) के दौरान हुई।

लॉर्ड स्पीकर का राज्य सभा में स्वागत करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने सम्मेलन में उनकी भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी उपस्थिति दोनों देशों के बीच सतत मित्रता एवं मजबूत संसदीय संबंधों को रेखांकित करती है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह दौरा न केवल उपयोगी बल्कि आनंददायक भी होगा तथा भारत की संसदीय परंपराओं, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों को निकट से समझने का अवसर प्रदान करेगा। बैठक के दौरान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि भारत और यूनाइटेड किंगडम का इतिहास दीर्घकालिक और पारस्परिक रहा है, जिसमें सदियों से विकसित होती संसदीय परंपराएं शामिल हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत की संसदीय प्रणाली वेस्टमिंस्टर मॉडल से प्रेरणा लेने के साथ ही भारत के विशिष्ट लोकतांत्रिक संरचना को प्रतिबिंबित करते हुए स्वाभाविक रूप से विकसित हुई है।

साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने विधि द्वारा शासन, संसदीय विशेषाधिकार तथा कार्यपालिका पर प्रभावी लोकतांत्रिक पर्यवेक्षण के प्रति दोनों संसदों की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि ये साझा सिद्धांत परस्पर सीखने के लिए एक सुदृढ़ आधार प्रदान करते हैं।

उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रमंडल संबंधों की नींव के तौर पर संसदीय कूटनीति के महत्व पर बल दिया और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के लिए विनिमय कार्यक्रमों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

उन्होंने कहा कि भारत ने अनेक अंतर-संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की मेज़बानी की है तथा उनमें भाग लिया है और उन्होंने यह सुझाव दिया कि संयुक्त कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा ज्ञान साझाकरण संबंधी पहलों के कार्यान्वयन पर विचार करना लाभप्रद होगा।

उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि डिजिटल नवाचार ने वैश्विक स्तर पर संसदीय कार्यप्रणाली को रूपांतरित कर दिया है और भारत ने भी अपनी संसदीय कार्यप्रणाली के अंतर्गत ई-संसद प्रणालियों, लाइव स्ट्रीमिंग तथा डिजिटाइज़्ड अभिलेखों को एकीकृत किया है।

उन्होंने डिजिटल पहलों के कार्यान्वयन में विशेष रूप से पहुंच बढ़ाने, पारदर्शिता को बढ़ावा देने तथा जन सहभागिता को प्रोत्साहित करने के संदर्भ में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के अनुभवों में विशेष रुचि व्यक्त की। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रमंडल संसद सदस्यों को विचारों के आदान-प्रदान, परस्पर सीखने तथा लोकतांत्रिक मानकों को बनाए रखने के लिए एक विशिष्ट मंच प्रदान करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पीठासीन अधिकारियों की यह साझा जिम्मेदारी है कि संसदीय लोकतंत्र समाज के सभी वर्गों के लिए प्रभावी रूप से कार्य करता रहे।

उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि भारत और यूनाइटेड किंगडम संसदीय एवं बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से प्रमुख वैश्विक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर कार्य कर सकते हैं। इनमें महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना, विधायी कार्रवाई के माध्यम से जलवायु अनुकूलता का संवर्धन करना, शिक्षा के क्षेत्र- में विशेषकर उच्च शिक्षा को सॉफ्ट पावर के रूप में मजबूत बनाना तथा प्रौद्योगिकी का उपयोग कर शासन को अधिक समावेशी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना शामिल है।

बैठक के समापन पर उपराष्ट्रपति ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति भारत की दृढ़ एवं साझा प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की, जो दोनों देशों के बीच निरंतर सहभागिता के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करती है। उन्होंने यह आशा भी व्यक्त की कि यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करेगी तथा ऐसी संयुक्त पहलों को प्रेरित करती रहेगी, जो राष्ट्रमंडल एवं विश्व के लिए एक आदर्श के रूप में कार्य कर सकें।

इस अवसर पर उपसभापति हरिवंश भी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी