गांधी और नेहरू ने भी अंग्रेजों से मांगी थी दया की अर्जी : सुनील देवधर
- वीर सावरकर का जीवन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के लिए समर्पित था : सुनील देवधर
लखनऊ, 30 मई (हि.स.)। माय होम इंडिया की ओर से स्वातंत्र्यवीर सावरकर जयंती महोत्सव 2026 का आयोजन शनिवार को भागीदारी भवन लखनऊ में किया गया। इस अवसर पर माय होम इंडिया के संस्थापक सुनील देवधर ने कहा कि वीर सावरकर का जीवन राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के लिए समर्पित था।
सुनील देवधर ने कहा कि महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू एवं भगत सिंह समेत सभी क्रान्तिकारियों ने अंग्रेजों से दया की अर्जी मांगी थी। मोतीलाल नेहरू ने अंग्रेजों को लिखा कि मेरे बेटे को चूहों से डर लगता है। राहुल गांधी को शर्म आनी चाहिए, वह कहते हैं कि सावरकर ने अंग्रेजों से माफी मांगी। वीर सावरकर ने माफी नहीं, दया की अर्जी मांगी थी। वह नेहरू एवं महात्मा गांधी ने भी मांगी थी।
उन्होंने कहा कि वीर सावरकर ने अपनी बेड़ियों की धार से कविता लिखना शुरू किया। पूरी दीवार कविता से भर गयी। उन्होंने उसे याद कर लिया। छ: हजार पंक्तियां सावरकर ने जेल में लिखीं।
सावरकर ने धर्मान्तरण का विरोध किया। हिन्दू कैदियों से कहा कि तुम उनके हाथ से खाने से मुसलमान नहीं बनोगे। उन्होंने हिन्दुओं को जाग्रत कर धर्मान्तरण रोका। सावरकर ने प्रात:काल जेल में शंखनाद शुरू कराया। कैदियों को पढ़ना लिखना सिखाया। उन्होंने समाज में जातिगत भेदभाव समाप्त करने और सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
मुख्य अतिथि के रूप में बाल विकास एवं महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि वीर सावरकर का जीवन मातृभूमि के प्रति समर्पण और त्याग की प्रेरणा देता है। कहा कि सावरकर केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार हैं।
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने उन्हें राष्ट्रभक्ति, साहस और अदम्य संकल्प का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में वीर सावरकर का योगदान अविस्मरणीय है तथा उनका त्याग और समर्पण विकसित भारत के निर्माण में सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन