ज्ञानवापी विवाद : उच्चतम न्यायालय की पहल को प्रतिवादी मुस्लिम पक्ष ने नकारा, मध्यस्थता बैठक में नहीं हाेंगे शामिल
-श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के समाधान के लिए मध्यस्थता बैठक मंगलवार को
वाराणसी, 13 जुलाई (हि.स.)। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के समाधान के लिए उच्चतम न्यायालय की पहल के तहत 14 जुलाई को प्रस्तावित मध्यस्थता (प्री-सुलह वार्ता) से प्रतिवादी मुस्लिम पक्ष ने दूरी बना ली है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने स्पष्ट किया है कि वह इस बैठक में शामिल नहीं होगी, क्योंकि उसके अनुसार यह आमंत्रण बाध्यकारी नहीं है।
यह मध्यस्थता बैठक मंगलवार को वाराणसी के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता केंद्र में प्रस्तावित है। इसमें ज्ञानवापी से जुड़े विभिन्न वादों के पक्षकारों और उनके अधिवक्ताओं को आमंत्रित किया गया है। बैठक केंद्र प्रभारी न्यायाधीश की अध्यक्षता में होगी और इसकी निगरानी जिला जज भी कर सकते हैं।
बैठक से एक दिन पहले सोमवार को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एस.एम.यासीन ने पत्र जारी कर कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के समाधान का जो आमंत्रण दिया गया है,वह अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कमेटी ने विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि वह 14 जुलाई को आयोजित मध्यस्थता बैठक में भाग नहीं लेगी।
पत्र में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने लंबित मामलों के आपसी सहमति से निस्तारण के उद्देश्य से विशेष लोक अदालत की व्यवस्था की है,जिसमें ज्ञानवापी जैसे संवेदनशील मामले भी शामिल किए गए हैं। हालांकि,यह प्रक्रिया स्वैच्छिक है और किसी पक्ष पर इसमें शामिल होने का कानूनी दायित्व नहीं है, इसलिए कमेटी ने बैठक से दूर रहने का फैसला किया है।
दूसरी ओर, ज्ञानवापी एवं श्रृंगार गौरी प्रकरण से जुड़े वादी पक्ष और उनके अधिवक्ताओं ने कहा कि मामला वर्ष 2022 से उच्चतम न्यायालय में लंबित है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को आपसी बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने का अवसर दिया है। उनका कहना है कि यदि मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के लिए सहमत होता है तो बातचीत संभव है,अन्यथा विवाद का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
इस मामले से जुड़े अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने मीडिया कर्मियों को बताया कि ज्ञानवापी से संबंधित लंबित सात पत्रावलियों के संबंध में नौ जुलाई को सभी पक्षों को नोटिस जारी किए गए थे। उन्होंने कहा कि तीन माह तक चले एएसआई सर्वेक्षण में मंदिर के अवशेष मिलने का दावा किया गया है और हिंदू पक्ष का कहना है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के ढांचे पर किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि मध्यस्थता से कोई समाधान नहीं निकलता है तो मामले की सुनवाई न्यायालय में पूर्ववत जारी रहेगी। वहीं,ज्ञानवापी प्रकरण में हिन्दू पक्ष से जुड़े अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी विवाद का हल निकालने के लिए हिंदू और मुस्लिम पक्ष को 14 जुलाई को वाराणसी न्यायालय के मध्यक्षता केन्द्र में उपस्थित होने को कहा है। ताकि ज्ञानवापी प्रकरण का समाधान हो सके। हम हिन्दू पक्ष ने निर्णय लिया है कि मन्दिर हमारा है। ज्ञानवापी में मुस्लिम पक्ष अतिक्रमणकारी है। अत: मुस्लिम पक्ष ज्ञानवापी से कब्जा छोड़े। जिससे मूल ज्योतिर्लिंग के स्थान पर भव्य काशी विश्वनाथ जी का मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त हो सके।
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को सुलझाने के लिए बड़ी पहल की है। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में सीधे निर्णय या दखल देने के बजाय विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से दोनों पक्षों (वादी हिंदू और प्रतिवादी मुस्लिम पक्ष) को बातचीत से समाधान निकालने को कहा है। इस संबंध में 14 जुलाई मंगलवार को वाराणसी के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित केंद्र में मध्यस्थता बैठक (प्री सुलह वार्ता)होगी। मध्यस्थता केंद्र में ज्ञानवापी के चार मुकदमों से जुड़े सभी वादी-प्रतिवादी और अधिवक्ता मौजूद रहेंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी