वाराणसी में स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दरबार में स्वयं महादेव बने याचक, शुक्रवार से सिर्फ पांच दिन के लिए खुलेंगे कपाट
-धनतेरस से भाई दूज तक होगा दर्शन का दुर्लभ अवसर, अन्नकूट महोत्सव की तैयारियां जोरों पर
वाराणसी, 05 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र स्थित विराजमान स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा के मंदिर का पट साल में सिर्फ एक बार, वह भी केवल चार या पांच दिनों के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुलता है। मान्यता है कि इस विशेष अवसर पर स्वयं काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ भी याचक रूप में मां अन्नपूर्णा से जगत कल्याण हेतु अन्न की याचना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर केवल धनतेरस से भाई दूज तक ही खुलता है। इस बार मंदिर के कपाट 06 नवंबर को धनतेरस के दिन खोले जाएंगे और श्रद्धालु इस बार भी पांच दिनों तक मां अन्नपूर्णा, महालक्ष्मी, भूदेवी और भगवान महादेव के रजत विग्रहों के दर्शन कर सकेंगे। इन दिनों में लाखों श्रद्धालु मां के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए देशभर से काशी पहुंचते हैं।
मां के खजाने का प्रसाद पाना सौभाग्य की बात
अन्नपूर्णा मठ मंदिर के पीठाधीश्वर महंत शंकर पुरी महाराज के अनुसार मंदिर में दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को मां अन्नपूर्णेश्वरी के ‘खजाने’ के रूप में चावल, धान का लावा और अठन्नी (सिक्का) दिया जाता है। काशी में मान्यता है कि इस अठन्नी को जो भक्त अपने धन स्थान या लॉकर में रखता है, उसके घर में पूरे वर्ष धन-धान्य की कमी नहीं होती।
स्वर्णमयी प्रतिमा की अद्भुत छटा
मंदिर में मां अन्नपूर्णा की ठोस स्वर्ण प्रतिमा कमलासन पर विराजमान है। मां के दाईं ओर देवी लक्ष्मी और बाईं ओर भूदेवी का स्वर्ण विग्रह स्थापित है। विशेष बात यह है कि बाबा विश्वनाथ की रजत प्रतिमा मां की झोली के सामने अन्न मांगने की मुद्रा में स्थित है, जो इस अद्वितीय दृष्य को और भी दिव्य बना देती है।
इतिहासकारों के अनुसार, वर्ष 1775 में जब काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ, तब उसके पार्श्व में मां अन्नपूर्णा का यह मंदिर पहले से ही स्थापित था। भीष्म पुराण में भी मां की इस स्वर्णमयी प्रतिमा का उल्लेख मिलता है। एक प्राचीन कथा के अनुसार, एक समय काशी में भयंकर अकाल पड़ा। तब भगवान शंकर ने स्वयं मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी और वचन लिया कि काशी में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहेगा। तभी से यह परंपरा है कि काशी आने वाले हर व्यक्ति को मां अन्नपूर्णा की कृपा से अन्न की प्राप्ति होती है।
अन्नकूट महोत्सव की तैयारियों में जुटा प्रशासन
मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन की ओर से दर्शन की व्यवस्था को अन्तिम रूप दिया गया है। लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के लिए विशेष योजना तैयार की गई है। प्रवेश-निकास के लिए बैरिकेडिंग, अस्थायी सीढ़ियां और मार्ग चिन्हित किए जा रहे हैं। साथ ही अन्नकूट महोत्सव की तैयारियों के तहत मिष्ठान्न और लड्डुओं को तैयार करने का कार्य भी शुरू हो गया है। महिलाएं बड़ी संख्या में प्रसाद की तैयारी में जुटी हैं और मंदिर की स्वच्छता व भोग की शुद्धता को लेकर भी प्रबंधन विशेष सतर्कता बरत रहा है।
इस बार धनतेरस पर बन रहे शुभ संयोग
धार्मिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस छह नवंबर को मनेगा। कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि छह नवम्बर को पूर्वाह्न 9:30 बजे से शुरू हो रही है। जो सात नवंबर को पूर्वाह्न 11:45 बजे तक रहेगी। इस बार धनतेरस पर प्रदोष काल शाम 5:49 बजे से लेकर रात 8:23 बजे तक रहेगा। धनतेरस की पूजा के लिए प्रदोष काल को सर्वोत्तम समय बताया गया है। ज्योतिषाचार्य रविन्द्र तिवारी के अनुसार, इस बार धनतेरस पर शुक्र प्रदोष एवं कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इस बार दिवाली रविवार आठ नवंबर को है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी