विहिप के एजेंडे में हिन्दू समाज की सुरक्षा सर्वोपरि : मिलिंद परांडे

 


- हिन्दू समाज से जुड़े हर संकट का स्थायी समाधान गढ़ने वाला वैश्विक संगठन है विहिप

- गौ-रक्षा, मतांतरण पर रोक और हिन्दू कन्याओं की सुरक्षा विहिप के तीन प्रमुख स्तम्भ

मीरजापुर, 09 जनवरी (हि.स.)। जब दुनिया पहचान, संस्कृति और सुरक्षा के सवालों से जूझ रही है। ऐसे समय में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने वैश्विक मंच पर अपने सामाजिक और सांस्कृतिक एजेंडे को और स्पष्ट रूप से रखा है। विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि संगठन की स्थापना केवल राम मंदिर आंदोलन के लिए नहीं हुई है। विहिप हिन्दू समाज के अस्तित्व, सम्मान और सुरक्षा से जुड़े हर संकट का स्थायी समाधान गढ़ने वाला वैश्विक संगठन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ-रक्षा, मतांतरण पर रोक और हिन्दू कन्याओं की सुरक्षा विहिप के तीन प्रमुख स्तम्भ हैं।

शुक्रवार को सिटी क्लब में आयोजित विंध्याचल विभाग की बैठक को सम्बोधित करते हुए परांडे ने संगठन की सामाजिक, सांस्कृतिक और सेवा-आधारित पहलों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ भारत माता और राम-जानकी दरबार के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। बैठक की अध्यक्षता जगजीत डंग ने की। जबकि संचालन प्रांत सत्संग प्रमुख महेश ने किया।

-मंदिरों को सेवा और सामाजिक चेतना का केंद्र बनाने का आह्वान

परांडे ने मंदिरों की भूमिका को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रखते हुए उन्हें सेवा, जनसुविधा, अन्नदान और सामाजिक प्रबोधन का केंद्र बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पुजारियों के प्रशिक्षण को समय की मांग बताते हुए सुझाव दिया कि आरती के बाद समुदाय को जीवन-मूल्यों पर मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए। मंदिरों में कछुए की उपस्थिति के आध्यात्मिक प्रतीकवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे इंद्रिय-संयम और अनुशासन का संकेत बताया। उन्होंने यह भी कहा कि विहिप महिला पुजारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है, जिसे शास्त्र सम्मत बताते हुए उन्होंने इसे सामाजिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया।

-स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर फोकस

मातृशक्ति के स्वास्थ्य विषय पर बोलते हुए परांडे ने एनीमिया, कुपोषण और कैंसर जैसी समस्याओं के प्रति व्यापक जागरूकता की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है। रोजगार के मोर्चे पर संगठन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि विहिप ने चालू वर्ष में 14,000 और पिछले वर्ष 11,000 लोगों को आजीविका से जोड़ा है। उन्होंने धर्मांतरण प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियानों और हिंसा की रोकथाम के लिए समुदाय-आधारित तैयारी पर जोर दिया।

-वैश्विक विस्तार और आंकड़ों के साथ प्रभाव

परांडे ने बताया कि विहिप की गतिविधियां वर्तमान में 30 देशों और भारत के 40,000 गांवों तक फैली हैं। संगठन के अनुसार, अब तक 21,000 लोगों की ‘घर वापसी’, 1,100 कन्याओं की सुरक्षा और 2.02 लाख से अधिक गौवंश का संरक्षण किया गया है। देश भर में 6,000 से अधिक सेवा प्रकल्प और 28,000 सत्संग संचालित हैं, जिनसे 72 लाख से अधिक हितचिंतक जुड़े हैं। उन्होंने बजरंग दल से विद्यार्थियों के बीच सक्रियता बढ़ाने और गौवंश के आर्थिक महत्व पर जनजागरूकता का आह्वान किया।

-व्यापक भागीदारी

बैठक में प्रांत संगठन मंत्री नितिन, प्रांत उपाध्यक्ष विद्याभूषण, विभाग पालक सुरेश अग्रवाल, विभाग मंत्री रामचंद्र शुक्ला समेत नगर विधायक रत्नाकर मिश्र, मझवां विधायक सुचिस्मिता मौर्य, पूर्व प्रांत संगठन मंत्री मनोज श्रीवास्तव और पूर्व नगर पालिका चेयरमैन मनोज जायसवाल आदि मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा